शास्त्री शाक्य राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा ग्राम खदिया नगला पोस्ट भरखनी
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प्रजापति प्रजापति ब्राह्मा चाम की पहचान नहीं कर पाए और उन्होंने अपनी पुत्री सरस्वती के साथ संभोग किया
मोहिनी को देखकर शंकर ऐसे मत वाले हो गए कीमत वाले भैंसे के समान कामातुर होकर उसके पीछे दौड़ पड़े ।
विष्णु ने जालंधर की पत्नी के साथ छल करके उसका सतीत्व भंग कर दिया।
जब तरूण जंघावती को देखकर विशेष रूप से कहा कामातुर हो गए
तो उसने पाने की आशा से मंदाल ऋषि ने लाश ढोने मे भी संकोच नही किया ।
घ्रताची नाम की अप्सरा को पाकर उनका हृदय हर्षित हो गया और विश्वामित्र 10 वर्ष तक उनके साथ रमण करते रहे ।
इंद्र ने छल बल से अहिल्या को प्राप्त करके उसे अपने अंक में भरकर उसके साथ समागम किया।
चंद्र ने अपने गुरु माता को अंक में भरकर उसके साथ रमण किया।
अपने छोटे भाई की पत्नी ममता पर मोहित होकर देव गुरु बृहस्पति ने उसके साथ बलात्कार किया।
धीवर पुत्री मत्सगंधा पर आसक्त होकर पराशर ने नौका में ही उस सुंदरी के साथ रमण किया।
चांडाल कन्या से संभोग करके वशिष्ठ को बड़ा संतोष मिला जिसके फलस्वरूप कपिल का जन्म हुआ।
विश्ववाची नामक अप्सरा को जंगल में पाकर अकेली राजा ययाति ने उसे गले से लगाकर संभोग किया ।
भरद्वाज ने घ्रताची नामक अप्सरा से प्रसंग करके द्रोण को न्म दिया।
राजा पुरोरवा ने इन्द्र से उर्वशी को मगाकर अपना काम बनाया जिससे आयुष नामक पुत्र पैदा हुआ ।।
विश्वामित्र ने मेनका के साथ सम्भोग किया दोनो के योग से सकुन्तला का जन्म हुआ ।
वरूण ने जब उर्वशी के साथ रमण किया तो उनके वशिष्ठ नामक पुत्र हुआ ।।।।।।।।
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प्रजापति प्रजापति ब्राह्मा चाम की पहचान नहीं कर पाए और उन्होंने अपनी पुत्री सरस्वती के साथ संभोग किया
मोहिनी को देखकर शंकर ऐसे मत वाले हो गए कीमत वाले भैंसे के समान कामातुर होकर उसके पीछे दौड़ पड़े ।
विष्णु ने जालंधर की पत्नी के साथ छल करके उसका सतीत्व भंग कर दिया।
जब तरूण जंघावती को देखकर विशेष रूप से कहा कामातुर हो गए
तो उसने पाने की आशा से मंदाल ऋषि ने लाश ढोने मे भी संकोच नही किया ।
घ्रताची नाम की अप्सरा को पाकर उनका हृदय हर्षित हो गया और विश्वामित्र 10 वर्ष तक उनके साथ रमण करते रहे ।
इंद्र ने छल बल से अहिल्या को प्राप्त करके उसे अपने अंक में भरकर उसके साथ समागम किया।
चंद्र ने अपने गुरु माता को अंक में भरकर उसके साथ रमण किया।
अपने छोटे भाई की पत्नी ममता पर मोहित होकर देव गुरु बृहस्पति ने उसके साथ बलात्कार किया।
धीवर पुत्री मत्सगंधा पर आसक्त होकर पराशर ने नौका में ही उस सुंदरी के साथ रमण किया।
चांडाल कन्या से संभोग करके वशिष्ठ को बड़ा संतोष मिला जिसके फलस्वरूप कपिल का जन्म हुआ।
विश्ववाची नामक अप्सरा को जंगल में पाकर अकेली राजा ययाति ने उसे गले से लगाकर संभोग किया ।
भरद्वाज ने घ्रताची नामक अप्सरा से प्रसंग करके द्रोण को न्म दिया।
राजा पुरोरवा ने इन्द्र से उर्वशी को मगाकर अपना काम बनाया जिससे आयुष नामक पुत्र पैदा हुआ ।।
विश्वामित्र ने मेनका के साथ सम्भोग किया दोनो के योग से सकुन्तला का जन्म हुआ ।
वरूण ने जब उर्वशी के साथ रमण किया तो उनके वशिष्ठ नामक पुत्र हुआ ।।।।।।।।


proof de ki brahspati ne kab balatkar kiya apne chhote bhai ki patni mamata ka, granth ka naam bata aur chapter no. page no. bhi bata
जवाब देंहटाएंvashishtha ne kab chandal ki ladki ke sath balatkar kiya, uska bhi proof de.
tere saare comment galat hain,