
Rahul Singh bauddha kushwaha Khadiya Nagla bharkhani
– जब दो वोट के अधिकार के लिए बाबा साहब लंदन में अंग्रेजों से लड़ रहे थे। तो उस समय मो० अली जिन्ना और सर आगार खां नाम के दो मुसलमान भाइयो ने बाबा साहब का साथ दिया था।
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2 :- जब ज्योतिबा फुले हमारे लिए पहली बार स्कूल खोल रहे थे तब उस समय उस्मान शेख नाम के मुसलमान भाई ज्योतिबा फुले को जमीन दिया था।
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3 :- माता सावित्री बाई फुले को उस्मान शेख की बहन फातिमा शेख ने सावित्री बाई फुले का साथ दिया और पहली शिक्षिका भी हुई।
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4 :- जब बाबा साहब हमें पानी दिलाने के लिए सत्यग्रह कर रहे थे तो उस सत्यग्रह को करने के लिए जमीन मुसलमान भाइयों ने दिया था।
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5 :- बाबा साहब को संविधान लिखने के लिए संविधान सभा में नहीं जाने दिया जा रहा था, तब बंगाल के 48% मुसलमान भाइयों ने ही बाबा साहब को चुनकर संविधान में भेजा था। खुद हमारे अपने लोगो ने वोट नही दिया था बाबा साहब को।
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6) मुसलमान टीपू सुल्तान ने हमारी बहन बेटी को तन ढकने का अधिकार दिया था अन्यथा हिन्दू ब्राह्मण के कारण हमारी बहन बेटी को स्तन खुलें रखने के लिए मजबूर किया गया था 😢
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हमारा दुश्मन मुसलमान नही है।
हमारा दुश्मन वो है जो हमको साफ पानी पीने से रोक कर रखा ।
हमारा दुश्मन वो है जो हमारे गले में मटका और कमर में झाड़ू बांधने के लिए मजबूर किया।
हमारा दुश्मन वो है जो हमको हजारों सालों से शिक्षा से दूर रखा।
हमारा दुश्मन वो है जो हम 85% भाइयो को 6743 जातियों में बाँट दिया।
हमारा दुश्मन मुसलमान है इस तरह के बहकावे में मत आओ।
अगर मुसलमान इस देश का दुश्मन होता तो,
अकबर का सेनापति मानसिंह एक हिन्दू, और
महाराणा प्रताप का सेनापति हकीम खां एक मुसलमान नहीं होता।
खतरा इस देश को नहीं, खतरा कुर्सी को है, इसलिए इस तरह से हम (sc.st.obc)को हिन्दू बनाकर और मुसलमान को हमारा दुशमन बाताकर भड़काया जा रहा है।
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अगर आप अभी नहीं जागे तो सरकार यह व्यवस्था करने जा रही है, आपके सामने थाली तो रखी जायेगी और उसमें भोजन भी रखा जायेगा, लेकिन आपका हाथ और मुँह बांध दिया जायेगा।
खाना आपके सामने रखा है आप लार तो टपकाओगे लेकिन खाना आपको मिलने वाला नहीं है।
इसलिए अगर चाहते हो कि मुँह पर लगाम न लगे तो, आप अपनी जिम्मेदारी को समझे और समाज को जगाने और संगठित करने का काम करिये।
वो दिन – रात काम कर रहें हैं संविधान को खत्म करने के लिए,
क्या आप इतना busy हो गए हैं कि आपके पास समय नहीं है।
कम से कम एक या दो घण्टे का समय दीजिए उनके बीच में जाइये।
यह मत सोचिए कि हमें कोई 100 – 200 देगा या 100 – 200 का तेल भरवायेगा तब हम चलेंगे।
क्यों की बाबा साहब ने किसी से यह नहीं कहा था कि मेरे बीबी बच्चे भूखे मर रहे है।
उसके लिए मुझे पैसे दो तो मैं समाज के लिए काम करूंगा। इसलिए संगठित हो जाइए।
अन्यथा सोचने का वक्त भी नही मिलेगा।
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आप ने इसे पढ़ने के लिए समय दिया उसका बहुत बहुत धन्यवाद ।
अब एक एहसान और कर दो इस संदेश को अन्य 10-20 साथियों में और भेज दो। बस यही तरीका है अपने साथियों को जागरूक करने का ।

🔴राजपूतो का सच्चा इतिहास 🔴
👉एक काल्पनिक मूवी में काल्पनिक राजपूत छोरी को काल्पनिक मुगल द्वारा देखने से पीढ़ियों की इज्जत चली गई, वाह…
यकीनन वास्तव में आपका DNA उच्च कोटि का है….
*★अकबर को छह राजपूत राजाओं ने अपनी कन्या भेट की….*
सबसे पहले….
01~> आमेर के राजा भारमल ने अपनी बेटी जोधा
02~> बीकानेर के राय कल्याण सिंह ने अपनी भतीजी
03~> जोधपुर के मालदेव ने अपनी बेटी रुक्मावती
04~> नगरकोट के राजा जयचंद ने अपनी बेटी
05~> डूंगरपुर के रावल ने भी अपनी बेटी अकबर को भेट दी
06~> मोरता का केशवदास क्यों पीछे रहता, उसने भी अपनी बेटी को अकबर के हरम मे भिजवा दिया
अब अकबर की पहले नम्बर वाली *बीबी – जोधा* के बेटा हुआ जिसका नाम था *जहांगीर*
जहांगीर के बाप – अकबर के लिए राजपूतों ने जैसी दरियादिली दिखायी
वैसी ही उसके बेटे – जहांगीर के लिए भी दिखायी
जहांगीर को भी>>>>>>>
~> आमेर के राजा भगवंत दास ने अपनी बेटी भेट की
~> जोधपुर का राजा – मोटा राजा भी अपनी बेटी को भेटकर आया
~> वापिस आमेर का राजा जगत सिंह भी अपनी बेटी को लेकर पहुँच गया
~> ओरछा का राजा रामचंद्र बुंदेला भी अपनी बेटी को जहांगीर के पास छोड़ आया
अब असल सवाल ये कि जहांगीर की पहली बीबी उसकी माँ जोधा की भतीजी थी
तो जहांगीर की पहले नम्बर वाली बीबी ने जोधा को बुआ कहा होगा या सासूमाँ ?
और जहांगीर की दूसरी बीबी जोधा के भतीजे की बेटी थी, यानी जहांगीर के पहले नम्बर के साले की बेटी तो उसने जहांगीर की पहली बीबी यानी अपनी बुआ को दीदी कहा होगा या बुआ ही बोला होगा ?
और जहांगीर के साले का बेटा जहांगीर को फूफा बोलता रहा या फिर फूफा को अपनी बहन भेट करने के बाद रिश्ता बदल लिया ?
और जहांगीर ने जोधा के भाई को मामा कहा होगा या मामा की बेटी से शादी करने के बाद ससुर बोला होगा ?
सप्रसंग व्याख्या करें….
फिर चाहों तो पद्मिनी के सम्मान की लड़ाई लड़ लेना रे, अकबर के भतीजों….
जितना सुब्रह्मण्यम स्वामी पद्मावती की चिंता कर रहें हैं, उतनी चिंता अगर अपनी बेटी की करते तो आज दामाद का नाम>>>>> *हैदर खान* नही होता
*लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी, विनय कटियार, ठाकरे के दामाद-बहनोई मुसलमान नहीं होते….*
*वो लोग कौन थे ?*
डरकर आत्महत्या करने वाली पद्मिनी को शूरवीर सतिमाता बनाया
और अकेले बंदूक उठाकर अत्याचार के खिलाफ लडने वाली साहसी फुलनदेवी को डाकू करार दिया
*वो लोग कौन थे ?*
भगतसिंग जैसे नास्तिकों को भगवा टोपा पहनाने वाले
*वो लोग कौन थे ?*
युध्द से डरकर मैदान से भागने वाली रानी लक्ष्मीबाई को शुरवीर बताकर असल में तलवार लेकर लड़ने वाली *”झलकारीबाई कोरी”* को इतिहास से मिटा दिया
*वो लोग कौन थे ?*
उदादेवी पासी, बिरसा मुंडा, अवंतीबाई लोधी ……. जैसे वीरों का इतिहास से मिटा देने वालें
*वो लोग कौन थे ?*
*वो लोग कौन थे ?*
जिन्होंने 2-2 बार माफिनामा लिखने वाले सांवरकर को वीर बनाया
*वो लोग कौन थे ?*
जिन्होनें बहुजनों को संसद में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वालें जातिवादी बालगंगाधर तिलक को लोकमान्य बनाया
*वो लोग कौन थे ?*
जिन्होनें ज्ञानेश्वर को संत बनाकर चमत्कार तो कराये, परंतु संत तुकाराम को वैकुंठ भेज दिया
*वो लोग कौन थे?*
गाडगे बाबा को हटाकर *साई बाबा* को बिठाकर सबका मालिक एक बोलने वाले
*वो कौन लोग थे?*
गांधीजी को महात्मा और नेहरुजी को चाचा बनाने वाले….
*वो लोग कौन थे ?*
*उत्तर :::——-*
असल में ये वही लोग हैं….
मक्कार….
धर्म के ठेकेदार….
16000 हजार औरतें होने के बाद भी जो जलकर मर जाए, वो खाक बहादुर हुई….
बहादुर तो फूलन देवी थी,,,,
जिन 22 राजपूतों ने उसके साथ बलात्कार किया, उन सभी राजपूतों को लाइन मे खड़ा करके गोलियों से भूनकर अपना बदला पूरा किया….
राजपूतों का इतिहास सिर्फ मुगलों और अंग्रेज़ों से समझोतों का इतिहास रहा है….
राजपूत अगर सही में बहादुर होते तो भारत कभी गुलाम ही नहीं होता….
वास्तव में ब्राह्मणों के लड़के और पीढियां जब कामचोर और नाकारा निकलने लगी तो उन्होंने कर्म प्रधान समाज को जाति प्रधान समाज में बदल दिया
ताकि उनकी पीढ़ियाँ आराम से रह सके
आज भी समाज की 95 प्रतिशत धन-संपदा और पद इनके पास हैं, लेकिन ये आज तक वैज्ञानिक अविष्कारों में रत्तीभर भी योगदान नहीं कर पाए….
आज आरक्षण कुछ समय के लिए लागू हुआ तो ये षड्यंत्र करने लगे उसे खत्म करने के लिए
*ये St.Sc.Obc वर्ग के लोग वास्तव में संकुचित सोच के मानसिक गुलाम हैं जो इन ब्राह्मण और क्षत्रियों की अंधभक्ति करके अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं।*
हकीकत में तो सवर्णों के धन-सम्पदा और संपत्ति को भी सवर्णों से लेकर वंचित समाज में बाँट देना चाहिए….
*जागों और ज्यादा से ज्यादा शेयर कर जगाओ…….
भारत मे धर्म परिवर्तन!
इतिहास की गपोड कथाओं में कहा गया है कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने हिंदुओं को जबरदस्ती मुस्लिम बना दिया था! गौर करने वाली एक बात यह है कि हिन्दू चरमपंथी संगठन यह आरोप सिर्फ मुस्लिमों पर ही लगाते है!
इतिहास के आईने में सच्चाई यह है कि इस देश का मूल धर्म बौद्ध परंपराओं से निकलता है।सिंधु घाटी सभ्यता व उसकी समकालीन सभ्यता की खुदाई में सिर्फ बौद्ध परंपराओं के अवशेष मिलते है कहीं भी ब्राह्मण धर्म का कोई अवशेष नहीं मिलता है।यह बात साबित है कि ब्राह्मण धर्म इस देश का नहीं बल्कि बाहरी धर्म है।चाहे यह थाईलैंड के रास्ते से आया हो या मध्य एशिया के रास्ते से!
दोनों आगे पीछे आये विदेशी धर्मों को एकदूसरे से बहुत खतरा नजर आता है जबकि यहां के मूलनिवासी लोगों को किसी से कभी खतरा नजर नहीं आया।इस देश का असल इतिहास छुपा दिया गया और ब्राह्मण धर्म कई नामों से इतिहास में दर्ज कर दिया गया।आप इतिहास पढ़ोगे तो ऐसे लगेगा कि बौद्धधर्मी पत्थरों की बिल्डिंग पर ब्राह्मण धर्मी पुताई की हुई है।
खैर आज का मुद्दा धर्म परिवर्तन का है तो इसी पर बात करते है।गपोड कथाओं से इतिहास में कुछ साबित होता नहीं है इसलिए हम ज्यादा पीछे नहीं जाते है।जब भी ब्राह्मणधर्म के पांव भारत से उखड़ते नजर आए तब इन लोगों ने विदेशियों का सहारा लिया था।जितने भी विदेशी आक्रमणकारी भारत मे आये उनके सहयोग देने वाले ये ही लोग रहे है!
सोचने वाली बात यह है कि हजारों साल पहले आने के बाद भी इनका भय समाप्त क्यों नहीं हुआ?इन पर खतरा सदा क्यों बना रहता है?दरअसल ब्राह्मण धर्म वर्णव्यवस्था से चलने वाला धर्म है और यह ऐसी व्यवस्था है कि इसको भारत के लोगों ने कभी स्वीकार नहीं किया क्योंकि यह मूलस्वरूप में कोई धर्म नहीं बल्कि पूंजी व संपदा पर कब्जा करके मौज उड़ाने का षड्यंत्र है।याद रहे मुगलकाल में ब्राह्मण धर्म के लोग जजिया कर से मुक्त थे।
जब भी वर्णव्यवस्था की जकड़न बढ़ाने की कोशिश की तब इनके खिलाफ बगावत हुई और इनको थामने के लिए विदेशियों का आगमन हुआ है।बुद्धकाल की बगावत के बाद शक,कुषाण, हूण आये,गुप्तकाल की बगावत के बाद ऐबक-गौरी आये!जब ये 15वीं सदी में कबीर,नानक,रैदास,आदि ने बगावत की तो मुगल आये!
आप एक नजर डालिए बगावत व विदेशियों के आगमन के समय पर हर कालखंड में यही कहानी नजर आयेगी।17वीं सदी में जब मुगलों का अवसान होने लगा और देशी राजा उठ खड़े हुए तो आगे अंग्रेज,डच,फ्रांसीसी, पुर्तगाली आये।यह एक तरह का संयोग नहीं है कि ब्राह्मण धर्म जड़ें जमाने की कोशिश करता,बगावत होती और विदेशी का आगमन होता।भारत के लोगों पर अपनी व्यवस्था को थोपने के लिए विदेशियों से सहयोग लेने से कभी परहेज नहीं किया गया।
आज भी देश की बुनियादी समस्याओं,हालातों को दरकिनार करके विदेशी कंपनियों को बढ़-चढ़कर महत्व यूँ ही नहीं दिया जा रहा है!ध्यान से आकलन करिये और इसपर नजर रखिये देश फिर से विदेशी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है क्योंकि इनका धर्म खतरे में है और पूरे देश में माहौल बनाया जा रहा है कि मुस्लिमो से ख़तरा है!
प्राचीन इतिहास की गपोड कथाओं से सटीक जानकारी समझ मे नहीं आयेगी इसलिए आप इतना समझ लीजिये कि सिक्ख धर्म किसके खतरे में आकर बना?सिक्ख गुरुओं ने मुगलों से तो सदा लड़ाइयां लड़ी थी फिर हिंदुओं से अलग होकर अलग धर्म बनाने की क्या जरूरत थी?हिन्दू एकजुट होकर रहते तो ज्यादा ताकतवर नहीं होते!ब्राह्मण धर्म की व्यवस्था से आजीज आकर सिक्ख धर्म बनाया गया था।
यह चंद समय की बात है कि लोग ब्राह्मण धर्म को त्यागकर विश्नोई बने,जसनाथी बने,लिंगायत बने!आज भी इस व्यस्था से परेशान होकर लोग ईसाई बन रहे है व कई और समूह धर्म परिवर्तन या नया धर्म बनाने की सोच रहे है!क्या इन लोगों को मुस्लिमों से अभी खतरा है और उनके दबाव में ऐसा कर रहे है?
भारत की समस्याओं की मूल जड़ ब्राह्मणवाद है और जब तक ब्राह्मणवादी व्यवस्था खत्म नहीं होती तब तक देश खुशहाल नहीं हो सकता।
गुजरात मे 15साल देश के वर्तमान प्रधानमंत्री व हिन्दू हृदय सम्राट मुख्यमंत्री रह चुके है व अब भी इनकी ही सरकार है।2जुलाई को विधानसभा में मुख्यमंत्री व गृहमंत्री का प्रभार देख रहे विजय रूपानी ने धर्म परिवर्तन के लिए आये आवेदन के आंकड़े सामने रखे।कुल 911आवेदन में से 863आवेदन हिंदुओं के है जो धर्म परिवर्तन करना चाहते है।
क्या अब भी गुजरात मे मुस्लिमों के दबाव में हिन्दू धर्म परिवर्तन कर रहे है?असल मे इस देश मे हजारों सालों से शोषण की वर्णवादी व्यवस्था थोपने व मुक्त होने की रस्साकशी चल रही है।ब्राह्मणवाद की जैसे ही जड़े उखड़ने लगी तो हिन्दू की चादर ओढ़कर चल दिये और मुस्लिमों से खतरे बताने की पाठशाला लगा ली!आज सोशल मीडिया में हर तीसरा व्यक्ति धर्म को खतरे से बाहर निकालने में लगा है जबकि असल खतरा भारत के लोगों को है।
भारत के 60करोड़ लोग मुख्यधारा से कट से गये है,दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में ही जिंदगी खप रही है,बच्चे कुपोषण से मर रहे है,इलाज के अभाव में मर रहे है,शिक्षा से दरकिनार किया जा रहा है,रोजगार छीनकर धार्मिक उन्मादी बनाया जा रहा है।भारत मे हर साल लाखों लोग गंदा पानी पीकर मर रहे है,हजारों किसान आत्महत्या कर रहे है,भिखारी बन रहे है!धर्म नहीं भारत के लोग खतरे में है!धर्म नहीं देश का भविष्य खतरे में है!