सोमवार, 25 मई 2020

25 maee 2020 ko graam khadiya nagala mein aag lagane se hua bhaaree nukasaan

Heavy damage due to fire in village Khadia Nagla on 25 May 2020 ,,

25 मई 2020 को ग्राम खदिया नगला भरखनी जिला हरदोई ।

मे लगी आग ।

जिसमे कई लोगो को बहुत बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा

^^ पीड़ित परिवार सुखदेव कुशवाहा का 25 हजार रुपए का भूसा और 10 कुंटल गेंहू जलकर राख हो गया पीड़ित बहुत ही गरीब और कमजोर व्यक्ति है ।

^^ और हरिबकश कुशवाहा का बहुत सारा घरेलू सामान जलकर राख हो गया ।

वहां पर पड़े कई लोगो की झोपडियां जलकर राख हो गई
जैसे उमेश चन्द्र कुशवाहा,
सर्वेश कुशवाहा , रमेश कुशवाहा,
की पड़ी हुई झोपड़िया जलकर के बिल्कुल राख हो गई।

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सोचने वाली बात तो यह है कि जब गांव के प्रधान महेश शर्मा

तथा दलेलपुर निवासी

एडवोकेट रामसागर

जब आए और लगती हुई आग को देखा तो उस स्थिति को देखकर यह लोग बहुत हंसते हुए नजर आए और भरखनी के प्रधान महेश शर्मा ने कहा कि यह तो बहुत ही अच्छा कार्य हुआ है अब यह जमीन बिल्कुल खाली हो गई है इस जमीन को जुतवा करके इसमें कोई फसल बुवा देंगे ।

ऐसी भयानक कष्टदायक स्थिति को देखते हुए गांव के लोगों ने शीघ्र ही इमरजेंसी सेवा फायर मशीन को फोन किया जिसमें आकर के बाद में जलती हुई धधकती हुई आग को बुझाने का कार्य किया।

शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा खदिया नगला भरखनी

शनिवार, 23 मई 2020

ज्ञापन प्रतिष्ठा में,. महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार नई दिल्ली विषय :– अयोध्या जिला फैजाबाद उत्तर प्रदेश में हो रही खुदाई में तथागत भगवान बुद्ध की मूर्ति व बौद्ध कालीन अवशेष मिलने पर उस स्थल को पुरातात्विक स्मारक घोषित किए जाने के संबंध में ज्ञापन

ज्ञापन

प्रतिष्ठा में,.

महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार नई दिल्ली

विषय :– अयोध्या जिला फैजाबाद उत्तर प्रदेश में हो रही खुदाई में तथागत भगवान बुद्ध की मूर्ति व बौद्ध कालीन अवशेष मिलने पर उस स्थल को पुरातात्विक स्मारक घोषित किए जाने के संबंध में ज्ञापन

महोदय ,

अवगत कराना है कि अयोध्या जिला फैजाबाद उत्तर प्रदेश में खुदाई के दौरान 2000 वर्ष पुरानी बौद्ध प्रतिमाएं, शिलालेख, धम्मचक्र आदि बौद्ध-कालीन प्रतीक व अवशेष प्राप्त हो रहे हैं .जो पुरातत्विक व ऐतिहासिक महत्व के दृष्टिकोण से मूल्यवान हैं. आप स्वयं विद्वान व जानकार हैं कि पुरातत्व महत्व के ऐतिहासिक स्थलों के साथ छेड़छाड़ करना, उनकी रचना व बनावट में बदलाव करना इतिहास को मिटाने के समान हैं और एक अक्षम्य अपराध है .संपूर्ण भारतवर्ष में अनेकों बौद्ध स्थलों का रखरखाव व नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (A.S.I.) के पास है! इन सभी स्थलों का ऐतिहासिक महत्व है

अयोध्या में समतलीकरण व खुदाई के दौरान तथागत बुद्ध की प्रतिमा व बौद्ध प्रतीक अवशेष मिलने से उनके ऐतिहासिक व पुरातत्विक महत्त्व से इनकार नहीं किया जा सकता.

आप स्वयं जानकार हैं कि पुरातात्विक महत्व के स्थलों की बनावट में छेड़छाड़ , तोड़फोड़ करना अथवा किसी भी प्रकार का बदलाव करना पुरातत्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 व बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम 1972 के अनुसार दंडनीय अपराध है.

आज दिनांक 23 मई 2020 को लखनऊ में बौद्ध विद्वानों व इतिहासकारों की एक महत्वपूर्ण बैठक बौद्ध भिक्षु सुमित रत्न थेरा जी की अध्यक्षता में आयोजित की गई

इस बैठक में सर्वसम्मति से निम्न प्रस्ताव पास किया गया :—

1. उच्च प्राथमिक व ऐतिहासिक महत्व के स्थल की सामान्य खुदाई तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए

2. उस स्थल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की निगरानी में विधिवत उत्खनन कार्य कराया जाए.

3.उत्खनन स्थल को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकार क्षेत्र में देकर राष्ट्रीय स्मारक के रूप में संरक्षित कर दिया जाए. 4.भारतीय इतिहास वेत्ताओं व पुरातत्व वेत्ताओं एवं बौद्ध विद्वानों का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल उत्खनन स्थल का निरीक्षण करे और अपनी रिपोर्ट संसद को प्रस्तुत करें!. 5. मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का भव्य मंदिर अयोध्या में ही किसी अन्य स्थल पर निर्मित कराया जाए.

महामहिम राष्ट्रपति महोदय से अनुरोध है कि उक्त अनुरोध को स्वीकार कर तत्काल प्रभावी आदेश जारी करने की कृपा करें ;

और भारतीय संविधान की रक्षा करें.

भवदीय

1.पूज्य बौद्ध भिक्षु सुमित रत्न थेरा

2.दददू प्रसाद पूर्व कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश शासन

3.राजाराम आनंद पूर्व राज्यमंत्री मंत्री उत्तर प्रदेश शासन

4.शैलेंद्र बौद्ध, लखनऊ

5.राजेश नंद फैजाबाद

6. दया सागर बौद्ध लखनऊ

7. लालमनि प्रसाद पूर्व सांसद बस्ती

8. अनूप प्रियदर्शी

9. रविंद्र कुमार सुल्तानपुर

10. विक्रम सिंह बौद्ध इटावा

11. ए.आर. अकेला साहित्यकार अलीगढ़

12.मिथिलेश कुमार लखनऊ

नोट – आप अपना नाम और अपने संगठन का नाम जोड़कर इस ज्ञापन को एसडीएम डीएम एवं सीधे तौर पर है मेल के द्वारा मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति को भेजें सबका मंगल हो धन्यवाद

बुधवार, 6 मई 2020

मई 2020 बुद्ध पूर्णिमा ‼️ बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त❗️

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🌹🌺🙏नमो बुद्धाय 🙏🌺🌹🍂
🌺‼️7 मई 2020 बुद्ध पूर्णिमा ‼️ बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त❗️
🌺6 मई 2020 को शाम 7:44 बजे से शुरू होकर 7 मई 2020 को दोपहर 4:14 बजे खत्म होगा। हिंदू धर्म में हर त्योहार उदया तिथि को ही मनाया जाता है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा भी 7 मई, वीरवार को मनायी जाएगी❗️
🌺वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। यह गौतम बुद्ध की जयंती है और उनका निर्वाण दिवस भी। इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। आज बौद्ध धर्म को मानने वाले विश्व में 50 करोड़ से अधिक लोग इस दिन को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। हिन्दू धर्मावलंबियों के अनुसार बुद्ध विष्णु के नौवें अवतार में हैं। अतः हिन्दुओं के लिए भी यह दिन पवित्र माना जाता है❗️
🌺इसी कारण बिहार स्थित बोधगया नामक स्थान हिन्दू व बौद्ध धर्मावलंबियों के पवित्र तीर्थ स्थान हैं। गृहत्याग के पश्चात सिद्धार्थ सात वर्षों तक वन में भटकते रहे। यहाँ उन्होंने कठोर तप किया और अंततः वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई। तभी से यह दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है❗️
🌺बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा सबसे बड़ा त्योहार का दिन होता है। इस दिन अनेक प्रकार के समारोह आयोजित किए गए हैं। अलग-अलग देशों में वहाँ के रीति- रिवाजों और संस्कृति के अनुसार समारोह आयोजित होते हैं। इस दिन बौद्ध घरों में दीपक जलाए जाते हैं और फूलों से घरों को सजाया जाता है❗️
🌺दुनियाभर से बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया आते हैं और प्रार्थनाएँ करते हैं। बौद्ध धर्म के धर्मग्रंथों का निरंतर पाठ किया जाता है। मंदिरों व घरों में अगरबत्ती लगाई जाती है। मूर्ति पर फल-फूल चढ़ाए जाते हैं और दीपक जलाकर पूजा की जाती है। बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है ❗️
🌺 उसकी शाखाओं पर हार व रंगीन पताकाएँ सजाई जाती हैं। जड़ों में दूध व सुगंधित पानी डाला जाता है। वृक्ष के आसपास दीपक जलाए जाते हैं। इस दिन मांसाहार का परहेज होता है क्योंकि बुद्ध पशु हिंसा के विरोधी थे। इस दिन किए गए अच्छे कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है। -पक्षियों को पिंजरे से मुक्त कर खुले आकाश में छोड़ा जाता है। -गरीबों को भोजन व वस्त्र दिए जाते हैं❗️
‼️आप सभी को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं ‼️
🙏नमो बुद्धाय 🙏

सम्राट बृहद्रथ मौर्य की हत्या का कारण

रेड चल रही सेना अपने चक्रवती सम्राट बृहद्रथा को सलामी दे रही थी !

अचानक से मंच पर ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने अपने ही सम्राट को बृहद्रथा को तलवार से चीर दिया !

अनार्य बृहद्रथा के ज़मीन पर गिरते ही, आर्य ब्राह्मण शुंग ने स्वयं को सम्राट घोषित कर दिया !

अब वैदिक ब्राह्मण पुष्यमित्र शुंग बुद्धमय मगध साम्राज्य का सम्राट बन चूका था, बौद्ध मठों को ज़मीन दोज़ करने का आदेश पारित हुआ !

अब ना रहा मगध साम्राज्य, ना ही बौद्ध सभ्यता ! मगध साम्राज्य शुंगा साम्राज्य बना और बौद्ध सभ्यता को वैदिक सभ्यता बनाने का दौर शुरू हुआ !

लाखो बौद्ध भिक्षुओं को मौत के घाट उतारा गया, बौद्ध मठों में आग लगाई गई, बौद्ध विहार टूटे !

बौद्ध धर्म को ताक़त और तलवार के बल पर धीरे धीरे कमजोर करने का दौर शुरू हुआ और वैदिक संस्कृति अपनाने पर लोगो को मजबुर किया गया !

जिन वैदिक ईरानी ब्राह्मणों को नंद साम्राज्य से नंद राजाओं ने देश निकाला किया, नंद वंश का अंत कर मौर्य वंश ने इन्ही वैदिकों को मगध में प्रवेश दिया, उन्हें मौर्य साम्राज्य के शासन में स्थान मिला पद मिला !

मौर्य साम्राज्य में वैदिक मजबूत से मजबूत होते गए और एक दिन जिसने दूध पिलाया था उसी को डस लिया !

पुष्यमित्र शुंग साम्राज्य के बाद जितने भी साम्राज्य आये उन्होंने वैदिक संस्कृति को और मजबूती प्रदान की, झुठे काल्पनिक भगवन निर्मित हुए उनके मंदिर बने !

उलूल जुलूल तर्कहीन ग्रन्थ लिखे गए !

फिर भी बौद्ध दर्शन के निशान मिटा नही पाए !

बृहद्रथ मौर्य की ओर

परेड चल रही सेना अपने चक्रवती सम्राट बृहद्रथा को सलामी दे रही थी !

अचानक से मंच पर ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने अपने ही सम्राट को बृहद्रथा को तलवार से चीर दिया !

अनार्य बृहद्रथा के ज़मीन पर गिरते ही, आर्य ब्राह्मण शुंग ने स्वयं को सम्राट घोषित कर दिया !

अब वैदिक ब्राह्मण पुष्यमित्र शुंग बुद्धमय मगध साम्राज्य का सम्राट बन चूका था, बौद्ध मठों को ज़मीन दोज़ करने का आदेश पारित हुआ !

अब ना रहा मगध साम्राज्य, ना ही बौद्ध सभ्यता ! मगध साम्राज्य शुंगा साम्राज्य बना और बौद्ध सभ्यता को वैदिक सभ्यता बनाने का दौर शुरू हुआ !

लाखो बौद्ध भिक्षुओं को मौत के घाट उतारा गया, बौद्ध मठों में आग लगाई गई, बौद्ध विहार टूटे !

बौद्ध धर्म को ताक़त और तलवार के बल पर धीरे धीरे कमजोर करने का दौर शुरू हुआ और वैदिक संस्कृति अपनाने पर लोगो को मजबुर किया गया !

जिन वैदिक ईरानी ब्राह्मणों को नंद साम्राज्य से नंद राजाओं ने देश निकाला किया, नंद वंश का अंत कर मौर्य वंश ने इन्ही वैदिकों को मगध में प्रवेश दिया, उन्हें मौर्य साम्राज्य के शासन में स्थान मिला पद मिला !

मौर्य साम्राज्य में वैदिक मजबूत से मजबूत होते गए और एक दिन जिसने दूध पिलाया था उसी को डस लिया !

पुष्यमित्र शुंग साम्राज्य के बाद जितने भी साम्राज्य आये उन्होंने वैदिक संस्कृति को और मजबूती प्रदान की, झुठे काल्पनिक भगवन निर्मित हुए उनके मंदिर बने !

उलूल जुलूल तर्कहीन ग्रन्थ लिखे गए !

फिर भी बौद्ध दर्शन के निशान मिटा नही पाए !

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शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा खदिया नगला भरखनी