मंगलवार, 31 मार्च 2020

Rahul Singh bauddha bharkhani

आयुष्मान !

प्रपन्ची, ढौंगी, पाखण्डी ,हत्यारे, कट्या तो सन्त शिरोमण केवल रवि (ज्ञान) के दास रविदास को ‘भगत’ कहने से भी नहीं

चूकते।

भगत का अर्थ ही ‘भग’को कूटने वाला है,

जैसे असंवैधानिक ‘हरिजन’

हरि का अर्थ ‘हरिजन’ यानी देवदासियों की औलाद होता है ।

मेरी दृष्टि में तो जो कथित

( काल्पनिक) ईश्वर मेंआस्था रखता है वही ‘हरिजन’ है,

तो जो-जो ‘सवर्ण’ हरि

यानी बन्दर, नाग , साँप आदि के पुजारी( आस्थावान) हैं उनमें जरा सी भी हया- शर्म वाकी है तो

वे आज से ही अपने नाम के आगे ‘हरिजन’ लगाना शुरू कर दैं ।

रही रविदास रचित कविता की बात तो जब जीवित ही कबीर साहिब का शिष्य भगवानदास उर्फ भग्गूदास ‘बीजक’ को चुरा कर ले गया तो कबीर को लिखना पडा़ कि,

“अब तो’बीजक’की प्रामाणिकता पर भी संदेह करना पड़ेगा।”

जो रविदेव ( रविदास) जीवन भर

पाखण्डवाद , राम, हरि के विरुद्ध

लिखता रहा उसकी हत्या

कतिपय बामान हत्यारेमिल कर

हत्या करके उन्हैं ‘भगत’ घोषित करके उन्हैं महिमा-मण्डित कर सकते हैं तो सब कुछ सम्भव है।

अब मैं ‘भगवान बुद्धऔर उनका धम्म ‘ रचित बाबा साहब अमेबेडकर की कृति का पद्यानुवाद कर रहाहूँ तो क्या मैं कालान्तर में बाबासाहब हो सकता हूँ बाबासाहब डॉ .भीमराव अम्बेडकर ही रहैंगे और मैं एक तुच्छ ‘ टुच्चा-मुच्चा ‘

भिक्षु ” शीलसागर ” ही रहूँगा।

एक बार मैं वैशाली बुद्धविहार आगरा से ऑटो रिक्शा में सफर कर रहा था तो एक ऐन्टीनाधारी कह रहा था कि हम तो बुद्ध को भी अवतार मानते हैं ।

मैंने कहा यह तो और भी बुरी बात है जो जीवनपर्यन्त भगवान, अवतार का खण्डन करते रहे कतिपय ‘बुद्ध’ को कुछ ऐण्टीनाधारी ही कुतर्क करते हैं।

फिर हे ! पूजनीय भूदेव किसी मन्दिर में राम ,कृष्ण,शिव आदि के मन्दिर में तथागत बुद्ध को बिठा दो तो जानूं।

उस तिलकधारी की बोलती बन्द हो गईं।

‘ चौबेजी चले तो छब्बे बनने पर दुबे ही रह गये ।’

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Rahul Singh bauddha

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शनिवार, 28 मार्च 2020

कोरोना वायरस ने सिद्ध किया कि ईश्वर एक मात्र कल्पना है अंधविश्वास नहीं है इस संसार में कोई देवी और देवता

ईश्वर कोई कोरोना वाइरस थोड़े ही जिससे मैं डर कर लॉकआउट होकर छुप जाऊँगा। यदि मुझे मेरा ईश्वर मिल गया तो पहले तो उसे जली कटी( खरी-खोटी) सुनाऊँगा ।

यह कहूँगा घौंजे ( ससुर) तुझे भी

खाज पा.की तरह वाय ( हवा ) लग गई है क्या?

जो अमीरों के जवानों(नवयुवकों) को तो हवाई जहाज से विदेशों से हजारों मील दूरी से वाह वाही लूटने (वोट बढ़ााने)

कोरोना फैलाने को बुला रहा है, और मेरे लचार बेबस गरीब मजदूरों के लिये खटारा बस भी नहीं ।

आग लगे तेरे संक्रमित कोरोना में जो लॉक डाउन में ऐसे नहीं तो भूख से तड़फ तड़फ कर मजदूर

( दिहाड़ी) मजदूर तड़फ तडफ कर कुड़क ( लढ़क) लैंगे और तेरी सत्ता रूपी बेटी (संसद) कहेगी कि ये रोटी की जगह केक विस्किट क्यों नहीं खा लेते ?

यदि मुझे मेरे ईश्वर तू कहीं कौने में कायर की तरह से छुपा मिल गया तो बस तेरी खैर नहीं तुझे

जतिया व सुटिया दूँगा ।

जी अँधभक्तो ! माफ करना मेरा उद्देश्य किसी के मन को ठेस पहुँचाना नहीं है ,

मैं तो अपने ईश्वर से रुष्ट हूँ।

अस्तु

भिक्षु

शीलसागर

हास्य- व्यंग्यकार

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

होली का रहस्य "

होली का रहस्य "



" होली का रहस्य "
हिरण्यकश्यप नास्तिक भारत का मूलनिवासी राजा था... पुत्र प्रहलाद विष्णु का भक्त था...परन्तु राजा हिरण्यकश्यप को अपने पुत्र के मुख से दुश्मन का नाम लेना विल्कुल पसंद नहीं था...तो राजा ने बेटा को मारने के लिए पहाड़ से डलवाया, साप की कोटरी मे छुड बाया, हाथी के सामने डलबाया, नही मरा...हर बार विष्णु ने बचा लिया.... फिर अपनी बहिन होलिका को बुलाया जिसे आग मे न जलने का वरदान प्राप्त था होलिका का अग्नि कुछ भी नहीं विगाड सकती थी... होलिका प्रहलाद को लेकर  आग मे बैठ गई और खुद जल गई विष्णु भक्त(गुलाम) प्रहलाद बच गया...??? ये कहानियां गढी गई....???
      नोट – ये सब नौटंकी हुई तब उस समय प्रहलाद की उम्र क्या थी ..? पहाड़ तथा हाथी के सामने डालना, साप की कोठरी में छोडना स्वतः अपनी तलवार से क्यों नहीं काट दिया...??? होलिका को वरदान किसने दिया..??? गोद मे भतीजे को लेकर बैठी उस समय बुआ और भतीजे की उम्र क्या थी...??? वरदान क्यों दिया उसका कोई कारण....??? वरदान वाला जल कैसे गया...? विना वरदान वाला बच कैसे गया...??? आग का काम जलाना हैं...???
    सारांश – सीधी बात ये थी कि हिरण्यकश्यप का राज्य छीनना था मनुवादियों को...हिरण्यकश्यप व उसके परिवार के सदस्यों को मारकर कहानियां गढ दी गई जिससे प्रजा विद्रोह न करे.... मनुवादी अपनी चाल मे कामयाब हो गये...
      !! जय महान !!
सौ० - दिनेश रत्न बौद्ध शाक्य महान दल मैनपुरी उत्तर प्रदेश भारत