गर्गी कॉलेज की घटना से पिछले वर्ष NCERT
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र्गी कॉलेज की घटना से पिछले वर्ष NCERT के सिलेबस से केरल की दलित महिलाओं के अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को ढकने के अधिकार को लेकर लड़ी गई लड़ाई की गाथा को निकाल देने की खबर याद आ गई.
जी हां! विश्वगुरुओं के देश में स्तन को ढकने का अधिकार!
इसके बदले में अटल बिहारी वाजपेयी की कविता सिलेबस में शामिल की गई है.
ऐसा क्यों हुआ ? आप खुद सोचियेगा.
इस पर कपार फोड़ने के बजाय आइये जानते है उन महिलाओं के मर्मान्तक संघर्ष को.
केरल के त्रावणकोर के ब्राह्मण राज्य में गैरब्राह्मण महिलाओं को स्तन ढकने की मनाही थी, साथ ही महिलाओं पर स्तन टैक्स लगाया जाता था. वे बिना टैक्स चुकाए अपने नवजात शिशु को अपने ही स्तन से दूध नही पिला सकतीं थीं.
केरल के चेर्थाला की दलित महिला नांगेली, जब माँ बनी तो उसके पास टैक्स चुकाने को पैसे नहीं थे. लिहाजा उसे उसके नवजात बच्चे से दूर कर दिया गया.
इस बात से नांगेली इतनी आहत हुई कि उसने विरोध स्वरुप अपने स्तन काटकर टैक्स अधिकारियों को दे दिये.
इसके बाद उनकी मौत हो गई.
उनके पति चिरुकंडन जब घर लौटकर आये तो उन्होंने भी आत्महत्या कर ली.
इसके बाद इस कुप्रथा के खिलाफ तीव्र आंदोलन हुआ.
1812 में ब्राह्मण राजा को टैक्स की यह कुप्रथा बंद करने के लिए बाध्य होना पड़ा लेकिन इसके बाद भी गैरब्राहमण महिलाओं को स्तन ढंकने के अधिकार से वंचित रखा गया.
स्तन ढकने के लिए अंग वस्त्र पहनने के अधिकार के लिए अय्यंकाली के नेतृत्व में लंबी लड़ाई चली, अगले चार दशकों तक यह लड़ाई चली , तब जाकर ब्राह्मण राजा से यह अधिकार पाया जा सका.
केरल में उस समय न सिर्फ अवर्ण बल्कि नंबूदिरी ब्राहमण और क्षत्रिय नायर जैसी जातियों की औरतों पर भी शरीर का ऊपरी हिस्सा ढकने से रोकने के कई नियम थे.
नंबूदिरी औरतों को घर के भीतर ऊपरी शरीर को खुला रखना पड़ता था. वे घर से बाहर निकलते समय ही अपना सीना ढक सकती थीं.
लेकिन मंदिर में उन्हें ऊपरी वस्त्र खोलकर ही जाना होता था.
नायर औरतों को ब्राह्मण पुरुषों के सामने अपना वक्ष खुला रखना होता था.
सबसे बुरी स्थिति दलित औरतों की थी जिन्हें कहीं भी अंगवस्त्र पहनने की मनाही थी.
पहनने पर उन्हें सजा भी हो जाती थी.
इस अपमानजनक रिवाज के खिलाफ 19 वीं सदी के शुरू में आवाजें उठनी शुरू हुईं.
इस तरह महिलाएं अक्सर इस सामाजिक प्रतिबंध को अनदेखा कर सम्मानजनक जीवन पाने की कोशिश करती रहीं. यह कुलीन मर्दों को बर्दाश्त नहीं हुआ. ऐसी महिलाओं पर हिंसक हमले होने लगे.
जो भी इस नियम की अवहेलना करती उसे सरे बाजार अपने ऊपरी वस्त्र उतारने को मजबूर किया जाता.
अवर्ण औरतों को छूना न पड़े इसके लिए सवर्ण पुरुष लंबे डंडे के सिरे पर छुरी बांध लेते और किसी महिला को ब्लाउज या कंचुकी पहना देखते तो उसे दूर से ही छुरी से फाड़ देते.
यहां तक कि वे औरतों को इस हाल में रस्सी से बांध कर सरे आम पेड़ पर लटका देते ताकि दूसरी औरतें ऐसा करते डरें.
Post ko share jaroor Karen jisase…sabhi ko pata chal sake ki brahmano ne kitani havaniyat ki huden paar ki……
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