▪ विपस्सना पालि शब्द है यह गौतम बुद्ध द्वारा बताई गई एक बौद्ध योग साधना हैं। विपश्यना का अर्थ है – विशेष प्रकार से देखना…इसे मेडिटेशन भी कहते हैं जो व्यक्ति में एकग्रता, सकारात्मकता के साथ दया और प्रेम की भावना को बढ़ाता है ।
▪ विपश्यना भारत की एक प्राचीन ध्यान विधि है, जिसे 2500 वर्ष पूर्व इसी देश में भगवान गौतम बुद्ध ने की और लोगों के कल्याण के लिए इसे सर्वसुलभ बनाया । उन्होंने इसका खुद अभ्यास किया और लोगों को करवाया, यह उसका सार हैं। बुद्ध के समय उत्तर भारत के बहुतायात लोग विपश्यना के अभ्यास से दुःख मुक्त हुए और जीवन खुशियों से भर गया। समय के साथ-साथ यह विद्या बर्मा, थाइलैंड आदि देशों में फैल गई और लोगों का कल्याण करने लगी, लेकिन बुद्ध के निर्वाण के कोई पाँच सौ साल बाद विपश्यना विधि की शुद्धता नष्ट हो गई और यह भारत से लुप्त हो गई, परंतु बर्मा में इस विद्या के प्रति समर्पित आचार्यो ने इसे शुद्घ रूप में कायम रखा।
▪ भगवान बुद्ध ने ध्यान की ‘विपश्यना-साधना’ द्वारा बुद्धत्व प्राप्त किया था। महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं में से एक विपश्यना भी है। यह वास्तव में सत्य की उपासना है। सत्य में जीने का अभ्यास है। विपश्यना इसी क्षण में यानी तत्काल में जीने की कला है। भूत की चिंताएं और भविष्य की आशंकाओं में जीने की जगह भगवान बुद्ध ने अपने शिष्यों को आज के बारे में सोचने के लिए कहा। विपश्यना सम्यक् ज्ञान है। विपश्यना जीवन की सच्चाई से भागने की शिक्षा नहीं देता है, बल्कि यह जीवन की सच्चाई को उसके वास्तविक रूप में स्वीकारने की प्रेरणा देता है।
▪ मेडिटेशन मनोविज्ञान पर आधारित होता है, जिसके अभ्यास से व्यक्ति भावनात्मक रूप से शांत और सकारात्मक रहता है। इसमें व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और प्रेम भाव बढ़ता है। इसको करने के लिए सबसे पहले आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं और अपने भीतर प्रेम भाव को महसूस करें और इस बात पर ध्यान दें कि आप स्वस्थ है। अपने भीतर आत्मविश्वास को जगाने के लिए यह मेडिटेशन काफी जरुरी माना जाता है। इसके बाद अगले चरण में अपने उस मित्र को याद करें और जो आपके सबसे करीब है और उसके साथ बिताये सभी अच्छे पलों को याद करें। इसके बाद उस व्यक्ति का ध्यान करें जिसके बारे में आप कभी भी कुछ नहीं सोचते हैं। उनके लिए अपने भीतर प्रेम जागृत करें। इससे आपके भीतर दूसरों के प्रति प्रेम और दया की भावना जागृत होगी और जिसके कारण आप आन्तरिक रूप से खुश रहते हैं।
▪ मेडिटेशन में व्यक्ति का सारा ध्यान उसकी सांसो पर होता है। इसमें व्यक्ति अपने श्वास की आवाजाही पर अपना ध्यान केन्द्रित करके अपने भीतर एकाग्रता की क्षमता को बढ़ाता है । जिससे आपके भीतर किसी भी काम पर ध्यान देने की क्षमता बढ़ेगी और एकाग्र मन से आप किसी भी काम और बेहतर तरीके से कर पाएंगे ।
▪ शरीर की रोग-प्रतिरोधी शक्ति में वृद्धिरक्तचाप में कमीतनाव में कमीस्मृति-क्षय में कमी (स्मरण शक्ति में वृद्धि)वृद्ध होने की गति में कमी
▪ मन शान्त होने पर उत्पादक शक्ति बढती है, लेखन आदि रचनात्मक कार्यों में यह विशेष रूप से लागू होता है।
▪ ध्यान से हमे अपने जीवन का उद्देश्य समझने में सहायता मिलती है। इसी तरह किसी कार्य का उद्देश्य एवं महत्ता का सही ज्ञान हो पाता है।
▪ मन की यही आदत है कि वह छोटी-छोटी अर्थहीन बातों को बड़ा करके गंभीर समस्यायों के रूप में बदल देता है। ध्यान से हम अर्थहीन बातों की समझ बढ जाती है; उनकी चिन्ता करना छोड़ देते हैं , सदा बडी तस्वीर देखने के अभ्यस्त हो जाते हैं।
▪ वैज्ञनिकों के अनुसार ध्यान से व्यग्रता का 40 प्रतिशत तक नाश होता है और मस्तिष्क की कार्य क्षमता बढ़ती है। बौद्ध धर्म में इसका उल्लेख मिलता है ।
#Buddha_Dhamma #Buddha
मंगलवार, 16 जून 2020
विपस्सना पालि शब्द है यह गौतम बुद्ध द्वारा बताई गई एक बौद्ध योग साधना हैं। विपश्यना का अर्थ है – विशेष प्रकार से देखना…इसे मेडिटेशन भी कहते हैं जो व्यक्ति में एकग्रता, सकारात्मकता के साथ दया और प्रेम की भावना को बढ़ाता है ।
▪ विपस्सना पालि शब्द है यह गौतम बुद्ध द्वारा बताई गई एक बौद्ध योग साधना हैं। विपश्यना का अर्थ है – विशेष प्रकार से देखना…इसे मेडिटेशन भी कहते हैं जो व्यक्ति में एकग्रता, सकारात्मकता के साथ दया और प्रेम की भावना को बढ़ाता है ।
▪ विपश्यना भारत की एक प्राचीन ध्यान विधि है, जिसे 2500 वर्ष पूर्व इसी देश में भगवान गौतम बुद्ध ने की और लोगों के कल्याण के लिए इसे सर्वसुलभ बनाया । उन्होंने इसका खुद अभ्यास किया और लोगों को करवाया, यह उसका सार हैं। बुद्ध के समय उत्तर भारत के बहुतायात लोग विपश्यना के अभ्यास से दुःख मुक्त हुए और जीवन खुशियों से भर गया। समय के साथ-साथ यह विद्या बर्मा, थाइलैंड आदि देशों में फैल गई और लोगों का कल्याण करने लगी, लेकिन बुद्ध के निर्वाण के कोई पाँच सौ साल बाद विपश्यना विधि की शुद्धता नष्ट हो गई और यह भारत से लुप्त हो गई, परंतु बर्मा में इस विद्या के प्रति समर्पित आचार्यो ने इसे शुद्घ रूप में कायम रखा।
▪ भगवान बुद्ध ने ध्यान की ‘विपश्यना-साधना’ द्वारा बुद्धत्व प्राप्त किया था। महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं में से एक विपश्यना भी है। यह वास्तव में सत्य की उपासना है। सत्य में जीने का अभ्यास है। विपश्यना इसी क्षण में यानी तत्काल में जीने की कला है। भूत की चिंताएं और भविष्य की आशंकाओं में जीने की जगह भगवान बुद्ध ने अपने शिष्यों को आज के बारे में सोचने के लिए कहा। विपश्यना सम्यक् ज्ञान है। विपश्यना जीवन की सच्चाई से भागने की शिक्षा नहीं देता है, बल्कि यह जीवन की सच्चाई को उसके वास्तविक रूप में स्वीकारने की प्रेरणा देता है।
▪ मेडिटेशन मनोविज्ञान पर आधारित होता है, जिसके अभ्यास से व्यक्ति भावनात्मक रूप से शांत और सकारात्मक रहता है। इसमें व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और प्रेम भाव बढ़ता है। इसको करने के लिए सबसे पहले आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं और अपने भीतर प्रेम भाव को महसूस करें और इस बात पर ध्यान दें कि आप स्वस्थ है। अपने भीतर आत्मविश्वास को जगाने के लिए यह मेडिटेशन काफी जरुरी माना जाता है। इसके बाद अगले चरण में अपने उस मित्र को याद करें और जो आपके सबसे करीब है और उसके साथ बिताये सभी अच्छे पलों को याद करें। इसके बाद उस व्यक्ति का ध्यान करें जिसके बारे में आप कभी भी कुछ नहीं सोचते हैं। उनके लिए अपने भीतर प्रेम जागृत करें। इससे आपके भीतर दूसरों के प्रति प्रेम और दया की भावना जागृत होगी और जिसके कारण आप आन्तरिक रूप से खुश रहते हैं।
▪ मेडिटेशन में व्यक्ति का सारा ध्यान उसकी सांसो पर होता है। इसमें व्यक्ति अपने श्वास की आवाजाही पर अपना ध्यान केन्द्रित करके अपने भीतर एकाग्रता की क्षमता को बढ़ाता है । जिससे आपके भीतर किसी भी काम पर ध्यान देने की क्षमता बढ़ेगी और एकाग्र मन से आप किसी भी काम और बेहतर तरीके से कर पाएंगे ।
▪ शरीर की रोग-प्रतिरोधी शक्ति में वृद्धिरक्तचाप में कमीतनाव में कमीस्मृति-क्षय में कमी (स्मरण शक्ति में वृद्धि)वृद्ध होने की गति में कमी
▪ मन शान्त होने पर उत्पादक शक्ति बढती है, लेखन आदि रचनात्मक कार्यों में यह विशेष रूप से लागू होता है।
▪ ध्यान से हमे अपने जीवन का उद्देश्य समझने में सहायता मिलती है। इसी तरह किसी कार्य का उद्देश्य एवं महत्ता का सही ज्ञान हो पाता है।
▪ मन की यही आदत है कि वह छोटी-छोटी अर्थहीन बातों को बड़ा करके गंभीर समस्यायों के रूप में बदल देता है। ध्यान से हम अर्थहीन बातों की समझ बढ जाती है; उनकी चिन्ता करना छोड़ देते हैं , सदा बडी तस्वीर देखने के अभ्यस्त हो जाते हैं।
▪ वैज्ञनिकों के अनुसार ध्यान से व्यग्रता का 40 प्रतिशत तक नाश होता है और मस्तिष्क की कार्य क्षमता बढ़ती है। बौद्ध धर्म में इसका उल्लेख मिलता है ।
#Buddha_Dhamma #Buddha
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
उम्दा पोस्ट।
जवाब देंहटाएं