मुझे स्त्री का ज्ञान नहीं। 🙂 🙂
महर्षि विभांडक एक ब्रह्म ग्यानी ऋषि थे। और ब्रह्मचारी थे। अविवाहित थे। एक दिन स्नान करते समय उनका उनका वीर्य पतित हो गया और उसको एक हिरनी ने पी लिया। हिरनी के गर्भ से एक मनुष्य* का जन्म हुआ। ऋषि विभांडक ने उसको अपना पुत्र समझ कर पाला पोसा और वेदों का ऐसा ज्ञान दिया की उनका पुत्र सिद्ध पुरुष बन गया। देवता भी उसके दर्शन को तरसते थे। ऋषि ने अपने पुत्र का नाम रिश्रिंग रखा।।
महर्षि रिश्रिंग। जो एक तेजस्वी पुरुष थे।
उसी राज्य में राजा दशरथ रहते थे जो उसी राज्य के राजा थे। राजा दशरथ की तीन पत्निया थी लेकिन पुत्र नहीं था। राजा दशरथ ने एक कन्या गॉद ली थी जिसका नाम था “शांता”” जो बहुत सुन्दर थी।
राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति हेतु महर्षि वशिष्ठ से अनुरोध किया। ऋषि वशिष्ट बोले–हे महाराज, मै पुत्रोयोस्टी यज्ञ की सलाह दूंगा मगर आज ये यज्ञ सिर्फ महर्षि कुमार रिश्रिंग करवा सकते है क्युकी वही इसके योग्य है। और रिश्रिंग कभी भी अपनी कुटिया और वन के बाहर नहीं आते। उनको खुश करके राजमहल तक लाना बहुत बड़ी चुनौती है।।
राजा दशरथ ने अपनी पुत्री शांता को रिश्रिंग के पास भेजा। शांता बहुत सुन्दर थी और रिश्रिंग को तो स्त्री क्या होती है पता भी न था।
रिश्रिंग ने वन में शांता को देखा तो बोले–ये कौन सा जीव है,दिखता मेरे जैसा है मगर मुझे आपनी तरफ आकर्षित कर रहा है।
रिश्रिंग शांता के पास गए और बोले–तुम कौन हो,तुम्हारी छाती में और मेरी छाती में अंतर क्यों है, स्तन की तरफ इशारा करके बोले, ये दो गोल गोल क्या है।।
शांता बोली–मै स्त्री हु।
रिश्रिंग बोले–स्त्री क्या होती है।
शांता ये बात जानती थी की ऋषि कुमार को स्त्री का ज्ञान नहीं है क्युकी इनको किसी स्त्री ने जन्म नहीं दिया।। और न ही ये वन के बाहर कभी निकले।।
शांता ने ऋषि कुमार को स्त्री पुरुष का अर्थ समझाया।।
रिश्रिंग शांता को देखकर उसके रूप यौवन के अधीन हो गए।।
शांता चली गयी और अगले दिन फिर आने का वादा किया।।
जीवन में पहली बार किसी स्त्री के दर्शन करने वाले रिश्रिंग बहुत बेचैन हो गए। अगले दिन वो शांता के आने की प्रतीक्षा करने लगे।
शांता फिर वन में आई और रिश्रिंग को काम(sex) का ज्ञान दिया और अपने प्रेम का इजहार रिश्रिंग से कर दिया।
रिश्रिंग पहले तो नहीं माने लेकिन बाद में शांता ने कहा–मै आपकी तन मन धन से सेवा करुँगी कृपया मेरा विवाह प्रस्ताव स्वीकार करे।
रिश्रिंग राजी हो गए और राजा दशरथ ने दोनों का विवाह करवा दिया। इस तरह रिश्रिंग की वन से बाहर निकाला गया और राजा दशरथ ने रिश्रिंग से पुत्र यज्ञ की इच्छा व्यक्त की।
रिश्रिंग ने यज्ञ करवाया और यज्ञ से यज्ञ पुरुष प्रगट हुए उन्होने राजा दशरथ को खीर दी जिसे खाकर उनकी रानियों ने राम, लक्ष्मन, भरत, शत्रुघ्न को जन्म दिया।।
प्रश्न ये है की महर्षि विभंडक के वीर्य से हिरनी कैसे गर्भवती हो गयी, वो तो पशु है स्त्री नहीं..??
उत्तर ये है की उस समय की तकनीक आज से ज्यादा आगे थी । वेद व्यास ने गांधारी के 100 पुत्रो को टेस्ट tube बेबी वाली तकनीक से जन्म दिया था। उसी प्रकार प्राचीन काल के सिद्ध ऋषि मुनि किसी भी मादा जीव से पुत्र प्राप्त करने की क्षमता रखते थे।
ऋषि गोकर्ण का जन्म गाय के पेट से हुआ था।। ऐसी बहुत सी घटनाएं है, जिनमें वेद-पूरानों के अधिकांश देवी-देवता ऋषि-मुनि मनु राणा-राव अप्राकृतिक, असामाजिक तरीके से पैदा हुए या घडे गये हैं।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा खदिया नगला भरखनी
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मंगलवार, 30 जून 2020
महा ऋषि बाभण्डक की कथा। काल्पनिक कहानियां
मुझे स्त्री का ज्ञान नहीं। 🙂 🙂
महर्षि विभांडक एक ब्रह्म ग्यानी ऋषि थे। और ब्रह्मचारी थे। अविवाहित थे। एक दिन स्नान करते समय उनका उनका वीर्य पतित हो गया और उसको एक हिरनी ने पी लिया। हिरनी के गर्भ से एक मनुष्य* का जन्म हुआ। ऋषि विभांडक ने उसको अपना पुत्र समझ कर पाला पोसा और वेदों का ऐसा ज्ञान दिया की उनका पुत्र सिद्ध पुरुष बन गया। देवता भी उसके दर्शन को तरसते थे। ऋषि ने अपने पुत्र का नाम रिश्रिंग रखा।।
महर्षि रिश्रिंग। जो एक तेजस्वी पुरुष थे।
उसी राज्य में राजा दशरथ रहते थे जो उसी राज्य के राजा थे। राजा दशरथ की तीन पत्निया थी लेकिन पुत्र नहीं था। राजा दशरथ ने एक कन्या गॉद ली थी जिसका नाम था “शांता”” जो बहुत सुन्दर थी।
राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति हेतु महर्षि वशिष्ठ से अनुरोध किया। ऋषि वशिष्ट बोले–हे महाराज, मै पुत्रोयोस्टी यज्ञ की सलाह दूंगा मगर आज ये यज्ञ सिर्फ महर्षि कुमार रिश्रिंग करवा सकते है क्युकी वही इसके योग्य है। और रिश्रिंग कभी भी अपनी कुटिया और वन के बाहर नहीं आते। उनको खुश करके राजमहल तक लाना बहुत बड़ी चुनौती है।।
राजा दशरथ ने अपनी पुत्री शांता को रिश्रिंग के पास भेजा। शांता बहुत सुन्दर थी और रिश्रिंग को तो स्त्री क्या होती है पता भी न था।
रिश्रिंग ने वन में शांता को देखा तो बोले–ये कौन सा जीव है,दिखता मेरे जैसा है मगर मुझे आपनी तरफ आकर्षित कर रहा है।
रिश्रिंग शांता के पास गए और बोले–तुम कौन हो,तुम्हारी छाती में और मेरी छाती में अंतर क्यों है, स्तन की तरफ इशारा करके बोले, ये दो गोल गोल क्या है।।
शांता बोली–मै स्त्री हु।
रिश्रिंग बोले–स्त्री क्या होती है।
शांता ये बात जानती थी की ऋषि कुमार को स्त्री का ज्ञान नहीं है क्युकी इनको किसी स्त्री ने जन्म नहीं दिया।। और न ही ये वन के बाहर कभी निकले।।
शांता ने ऋषि कुमार को स्त्री पुरुष का अर्थ समझाया।।
रिश्रिंग शांता को देखकर उसके रूप यौवन के अधीन हो गए।।
शांता चली गयी और अगले दिन फिर आने का वादा किया।।
जीवन में पहली बार किसी स्त्री के दर्शन करने वाले रिश्रिंग बहुत बेचैन हो गए। अगले दिन वो शांता के आने की प्रतीक्षा करने लगे।
शांता फिर वन में आई और रिश्रिंग को काम(sex) का ज्ञान दिया और अपने प्रेम का इजहार रिश्रिंग से कर दिया।
रिश्रिंग पहले तो नहीं माने लेकिन बाद में शांता ने कहा–मै आपकी तन मन धन से सेवा करुँगी कृपया मेरा विवाह प्रस्ताव स्वीकार करे।
रिश्रिंग राजी हो गए और राजा दशरथ ने दोनों का विवाह करवा दिया। इस तरह रिश्रिंग की वन से बाहर निकाला गया और राजा दशरथ ने रिश्रिंग से पुत्र यज्ञ की इच्छा व्यक्त की।
रिश्रिंग ने यज्ञ करवाया और यज्ञ से यज्ञ पुरुष प्रगट हुए उन्होने राजा दशरथ को खीर दी जिसे खाकर उनकी रानियों ने राम, लक्ष्मन, भरत, शत्रुघ्न को जन्म दिया।।
प्रश्न ये है की महर्षि विभंडक के वीर्य से हिरनी कैसे गर्भवती हो गयी, वो तो पशु है स्त्री नहीं..??
उत्तर ये है की उस समय की तकनीक आज से ज्यादा आगे थी । वेद व्यास ने गांधारी के 100 पुत्रो को टेस्ट tube बेबी वाली तकनीक से जन्म दिया था। उसी प्रकार प्राचीन काल के सिद्ध ऋषि मुनि किसी भी मादा जीव से पुत्र प्राप्त करने की क्षमता रखते थे।
ऋषि गोकर्ण का जन्म गाय के पेट से हुआ था।। ऐसी बहुत सी घटनाएं है, जिनमें वेद-पूरानों के अधिकांश देवी-देवता ऋषि-मुनि मनु राणा-राव अप्राकृतिक, असामाजिक तरीके से पैदा हुए या घडे गये हैं।
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शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा खदिया नगला भरखनी
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