मंगलवार, 21 जनवरी 2020

त्रेता युग की सच्चाई

अंधविश्वास ने भारत का सत्यानाश कर दिया।।

नल-नील ने पत्थर पर राम-नाम लिखा और समुद्र में तैरा दिया ….

तो जब हनुमान अपना शरीर इतना बड़ा कर सकता था कि वह पृथ्वी से 110 गुने बड़े सूर्य को फल समझकर निगल गया था तो राम का नाम लिखकर पत्थर पर तैराने की आवश्यकता इतनी मेहनत करने की जरूरत क्या थी ????..

और फिर राम हुये त्रेता युग में यानि त्रेता युग आज से कितने वर्ष पहले था ये देखें पहले आप कि कलियुग के 4320000 वर्ष होते हैं और द्वापर के 4320000×2=8640000वर्ष

और त्रेता के 4320000 x3=12960000 वर्ष

अब अगर त्रेता के मध्य में भी राम हुये थे तो इसका आधा

यानि 6480000 वर्ष +8640000 +कलि के कृष्ण की मृत्युके समय कलि शुरू माना गया है तो भी लगभग 5500 वर्ष मानते हैं ।

तो राम कुल आज से लगभग 15125500 वर्ष पूर्व हुये थे यानि डेढ़ करोड़ वर्ष से भी ज्यादा पहले ये राम और वानर सेना थी।

तो भाई मनुष्य जाति का विकास हुआ 1 लाख वर्ष पूर्व और उन्हें उस समय लिखना पढ़ना नहीं आता था और मनुष्य ने खेती आदि पशुपालन सीखा लगभग 10 हज़ार साल पहले।

तो नल-नील जो काल्पनिक बन्दर हैं इन्होंने कौन सी लिपि और कौन सी भाषा में राम लिखा था क्योंकि बुद्ध के काल तक भी वेद आदि सभी शास्त्र चार्वाक आदि भी अपने शिष्यों को गुरु शिष्य परम्परा से श्रुति मिति यानि बोलकर और रटकर ही सीखते सिखाते थे। उस समय कोई लिपि का विकास नहीं हुआ था एवं यह जो आज की वर्णमाला के ———-

अं

अः

क, ख ,ग ,घ ,ड़

च ,छ ,ज,झ,ञ

ट ,ठ ,ड ,ढ़, ण

त ,थ, द ,ध ,न

प,फ,ब, भ,म

य, र ,ल,व ,स,श,ष, क्ष ,ह

आदि लिखने का तरीका है ये तो मात्र 500 से 800 वर्ष पुराना ही है इससे पहले ये अक्षर अलग प्रकार से लिखे जाते थे और भाषा भी बहुत बदल गयी तब से लेकर आज तक और नित्य प्रति दिन बदल रही है ।

तो इतने साल पहले तो डायनासौर थे डेढ़ करोड़ साल पहले कोई स्तनधारी जीव भी नहीं था विकसित रूप में जो भी स्तनधारी जीव थे धरती पर वे बिलों में रहते थे, तब एक बहुत बड़े उल्का पिण्ड के पृथ्वी से टकराने पर प्रलय हुई जिससे सारे बड़े जीव जो पृथ्वी पर थे जल में थे वे डायनासोर की प्रजातियां नष्ट हो गयी और बाद में धीरे-धीरे विकास के फलस्वरूप बचे हुए नन्हे स्तनधारी वर्ग के जीवों को फलने-फूलने का मौक़ा मिला, तो इसी कारण किसी पाखण्ड शास्त्र में डायनासोर का नाम नहीं और बातें गप्पे भर दिये पण्डा ने क्योंकि वे हीन बुध्दि प्राणी सोचते रहे कि दुनिया में कोई बात खोज नहीं सकेगा, बस वे जो भी बकवास करंगे उसे लोकोक्ति के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी लोग मानते रहेंगे और आज राम का नाम लेकर नित नया अंधविश्वास फैलाते हैं सबसे बड़ी बात जो लोग बेचारे साइंस और जीव विज्ञान की खोजों को यथारूप नहीं जानते वे माने तो माने यहां तो लुळ पढ़े लिखे भी ऐसी बकवास को धारण करते और प्रचारित करते दीख पड़ते हैं ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें