Buddhist monk Sudhamnath Thailand visits India
नमो बुध्दाय
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मुझे लिखते हुए बड़ा हर्ष हो रहा है कि अर्हत पूज्य भन्ते महास्थविर सुधम्मनाथ व फ्रापार्नचाई जी ने भारत में आकर के जनकल्याण करने का कार्य किया
सर्वप्रथम पूज्य भन्ते महास्थविर सुधम्मनाथ जी व फ्रापार्नचाई जी
सन 2015 में भारत आए थे उन्होंने सबसे पहले मैनपुरी जसराजपुर राजघाट संकिसा में (युथ बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ़ इंडिया) से संपर्क किया बाई बीएसआफ इंडिया के अध्यक्ष सुरेश चंद्र बौद्ध के माध्यम से गुरु जी ने मैनपुरी में लोगों को निर्वाण सिखाया।
फिर माननीय अध्यक्ष जी के माध्यम से ही जिला हरदोई रूपापुर में शाक्य बिजय सिंह कुशवाहा से गुरु जी का संपर्क हुआ गुरु जी ने जिला हरदोई रूपापुर में आकर हजारों लोगों को निर्वाण सिखाने का कार्य किया।
चलते हुए इसी सिलसिले के दौरान सन 2016 में 27 व 28 मार्च को शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा के निवेदन करने पर बिजय सिंह जी के माध्यम से गुरूजी ग्राम खदिया नगला मे आए।
और लोगों को निर्वाण सिखाने का कार्य किया
सन 2017 में शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा गुरुजी ग्राम खानपुर जिला फर्रुखाबाद मैं जा कर के लोगों को निर्वाण सिखाया ।
चौथी बार गुरुजी सन 2018 में जब भारत आए तो उन्होंने शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा बिजयसिह कुशवाहा जी के माध्यम से
ग्राम कड़क्का खानपुर ग्राम व पोस्ट ककराला जलालाबाद जिला शाहजहांपुर रामपुर मजरा कांट जिला शाहजहांपुर
खदिया नगला भरखनी शाहाबाद हरपालपुर ककरा रत्नापुर आदि गांवों में भ्रमण कर लोगों को निर्वाण सिखाया
गुरु जी ने बताया है कि निर्माण ही परम सुख है निर्वाण के अलावा संसार में कोई दूसरा सुख हो ही नहीं सकता।
मनुष्य का पुनर्जन्म उसकी ही इच्छा से होता है अगर मनुष्य अपने मन को अपने वश में कर ले तो उसका पुनर्जन्म नहीं होगा जैसे हमने किसी वस्तु को चाहा फिर उसे प्राप्त करने का प्रयास किया और हमें वह वस्तु प्राप्त हो गई
अगर हम उस वस्तु को न चाहते तो क्या उसे हम प्राप्त करते नहीं ना
इसी तरह जब हम मनुष्य जन्म को अच्छा समझ कर प्राप्त करना चाहते हैं तभी हमें पुनर्जन्म होता है।
गुरु जी ने आकर हमें परम ज्ञान दिया मैं गुरु जी के चरणों का हृदय से आभारी हूं।।।।।।
शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा
खदिया नगला हरदोई
नमो बुद्धाय ।।।।।।।।।

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