[30/10, 10:59 AM] Rahul Singh bauddha 🎻🎤🎹🎼🎸: https://rahulsinghbauddha.wordpress.com/
[31/10, 10:20 AM] Rahul Singh bauddha 🎻🎤🎹🎼🎸: https://www.youtube.com/playlist?list=PLUDiUJ_KaCeL2IsjlHWC9ONvhn66RSmUG
[2/11, 3:50 AM] Rahul Singh bauddha 🎻🎤🎹🎼🎸: https://rahulbauddha563.blogspot.com/?m=1
[2/11, 5:37 PM] Rahul Singh bauddha 🎻🎤🎹🎼🎸: https://youtu.be/dB_A4_cly8A
[2/12, 7:46 AM] Rahul Singh bauddha 🎻🎤🎹🎼🎸: *शूद्र, बहुजन, मूलनिवासी मतलब ST.SC.OBC और मैनोरटी*
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*आखिर OBC,कौन है...???*
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*इस प्रश्न का उतर 55%आबादी वाले,OBC,समुदाय के ज्यादातर बुद्धिजीवियों और पढ़े-लिखे लोगों के पास,आज भी नहीं है*।
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*OBC,,जातियों को ही पौराणिक ब्राह्मण पंडितो ने वास्तविक शूद्र माना है*।
*जबकि,,SC,ST,को चारों वर्णों से बाहर रखा है. इनको अछूत तथा बहिष्कृत रखा है। इसलिए इनसे सेवा करवाना अधर्म है* ।
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*1922 में मद्रास हाईकोर्ट ने मदुराई के कुर्मी, यादव-आहिर को,शूद्र घोषित किया था.जबकि वे क्षत्रिय होने का दावा कर रहे थे...*
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*1924 में भूमिहार जमीदार नारायण सिंह ने बिहार के मुंगेर जिला के लाखुचक गाँव में जनेऊ पहनने का सामूहिक कार्यक्रम कर रहे यादवो पर सैकड़ोँ की सेना के साथ हमला किया था* ।
*नारायण सिंह का कहना था कि धर्म की रक्षा राजा का कर्तव्य है और शूद्र यादव जनेऊ धारण कैसे कर सकते है ??*
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*1924 में मद्रास हाईकोर्ट ने छत्रपति शिवाजी के वंशज एकोजी के क्षत्रिय होने के दावे को ख़ारिज कर दिया था। मद्रास हाईकोर्ट ने 229 पेज के अपने फैसले में मराठा को क्षत्रिय नहीं बल्कि शूद्र वर्ण के घोषित किया था*।
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*1926 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्वामी विवेकानंद की कायस्थ जाति को क्षत्रिय नहीं माना । तथा कायस्थों के शूद्र होने का फैसला दिया था।*
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*1928 में बोम्बे प्रान्त के गवर्नर ने स्टार्ट नाम के एक अधिकारी की अध्यक्षता में पिछड़ी जातियों के लिए एक कमेटी नियुक्त की थी। इस कमेटी में डॉ बाबासाहेब अंबेडकर ने शुद्र वर्ण से जुडी जातियों के लिए*,,
*OTHER BACKWARD CAST शब्द का सर्वप्रथम उपयोग किया था* ।
*इसी शब्द का शोर्टफॉर्म,,OBC है जिसको सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ी हुई जाति के रूप में आज हम पहचानते है और उनको पिछड़ी जातियाँ OBC कहते है।*
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*स्टार्ट कमीटी के समक्ष अपनी बात रखते हुए बाबा साहेब ने देश की जनसंख्या को तीन भाग में बांटा था-*
(1) *अपरकास्ट(Upercast) जिसमे ब्राह्मण, क्षत्रिय-राजपूत और वैश्य ये तीन वर्ण आते थे।*
(2) *बेकवर्ड र्कास्ट (Backward cast) जिसमे सबसे पिछड़ी और अछूत बनायीं गई जातियां और आदिवासी समुदाय की जातियां को समाविष्ट की गई थी*
(3) *जो जातियां बेकवर्ड कास्ट और अपर कास्ट के बीच में आती थी, एससी शुद्र वर्ण की मानी गई जातियों के लिए,, Other backward cast,,शब्द का प्रयोग किया गया था*।
*इन्ही शुद्र जातियों को मनुस्मृति में ब्राह्मणों द्वारा खूब लताड़ा गया है,किंतु ये शूद्र जातियां आज भी ब्रह्मणवाद के पैरों तले रौंदे जाने को अपना सौभाग्य समझती है*।
*📢📢 भारत के 72 करोड़ ओबीसी की सबसे बड़ी समस्या, कारण और निवारण ? 📢📢*
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*👉 भारत में लोकतंत्र लागू् होने के 70 बर्ष बाद भी यहां लोकतंत्र लागू नहीं हो सका है।*
*👉 ये लोकतंत्र क्या है ??*
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*जनता का*
*जनता के लिए*
*जनता के द्वारा शासन व्यवस्था*
*👉 सरल भाषा में लोकतंत्र का मतलब है, सभी को संख्या के आधार पर सभी क्षेत्रों में हिस्सेदारी मिलना चाहिये :-*
*जिसकी जितनी संख्या भारी*
*उसकी उतनी हिस्सेदारी*
*👉 अब देखते हैं कि देश में आजादी के 70 वर्षों में किसको क्या मिला और कौन कितनी संख्या में हैं ??*
*👉 भारत की जनता में*
*सामान्य - 10%*
*एससी - 15%*
*एसटी - 7.5%*
*ओबीसी - 67.5%*
*👉 भारत की जनता में सबसे अधिक संख्या ओबीसी की है। भारत की केंद्र की और सभी राज्य की सरकारे लगभग 30% वोटों से बनती है, वहीं ओबीसी की संख्या लगभग 67.5% है। मतलव सरकार बनाने के लिए जितनी संख्या चाहिये उससे दोगुनी से भी ज्यादा संख्या ओबीसी की है।*
*👉 भारत में लोकतंत्र की स्थापना के 70 वर्ष बाद भी यहां लोकतंत्र स्थापित नहीं हो पाया है। अभी तक यहां 10% सामान्य जाती वालो की सरकार चल रही है। ओबीसी और किसान समाज को मूर्ख बनाकर शोषित किया जा रहा है।*
*👉 सरकारी नौकरी में विभिन्न समाजों की हिस्सेदारी संख्या के आधार पर होना था, मतलब ओबीसी को सभी क्षेत्रों में 67% हिस्सेदारी होनी थी। जबकि स्थिति देखें कितनी दयनीय है।*:-
*(1) SC :- 15% - 12 %*
*(2) ST :- 7.5% - 05 %*
*(3) OBC :- 67.5% - 04 %*
*(4) GEN :- 10% - 79 %*
*👉 साथ ही ओबीसी के आरक्षण में असंवैधानिक रूप से क्रीमीलेयर का गिफ्ट भी दिया है। जो संवैधानिक रूप से गलत है।*
*👉 जबकि एससी को 15% होना था, एसटी को 7.5%, ओबीसी को 67% और सामान्य को 10% होना था। तब लोकतंत्र लागू होता।*
*👉 ओबीसी समाज का नौकरी के अलावा दूसरे क्षेत्रों में हिस्सेदारी (आरक्षण) की स्थिति देखे, जबकि सभी जगह 67% होना था:-*
*राष्ट्रपति सचिवालय- 0%*
*प्रधानमंत्री सचिवालय- 0%*
*न्यायपालिका - 0% - होना था 67%*
*सेना - 0% - होना था 67%*
*मीडिया - 0% - होना था 67%*
*उद्योग - 0% - होना था 67%*
*निजी क्षेत्र - 0% - होना था 67%*
*👉 ओबीसी समाज अपने साथ होने वाले अन्याय से कब तक बेखबर रहेगा ??*
*👉 67% ओबीसी को केंद्र में 67% आरक्षण (हिस्सेदारी) के स्थान पर 40 वर्ष बाद केवल 27% दिया और उसमें भी असंवैधानिक क्रीमीलेयर लगा दिया। और अभी तक केवल 4% ही भर्ती हो सकी है, 63% जनरल खा रहे है*
*👉 मध्यप्रदेश के 54% ओबीसी के लिए 40 वर्ष बाद क्रीमीलेयर के साथ केवल 14% आरक्षण मिला, भर्ती केवल 4% हुआ। बैकलाग 10% खाली है। जबकि होना था 54%, बाकी 50% जनरल वाले खा रहे है।*
*👉 आखिर ओबीसी अपने साथ होने वाले अन्याय को कब तक रहते रहेंगे ?*
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*📢📢 ओबीसी की बरबादी का प्रमुख कारण क्या है ?📢📢*
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*👉 देश में ओबीसी समाज का कोई मजबूत संगठन नहीं था।*
*👉 ओबीसी समाज को दुश्मनों ने 3743 तुकड़ो में बांट के रखा है।*
*किसी को लोधी में,*
*किसी को कुर्मी में*
*किसी को यादव में*
*किसी को शाक्य में*
*किसी को तेली में*
*किसी को कुन्वी में*
*किसी कलार मैं*
*किसी को गुर्जर में*
*किसी को गडरिया मे*
*किसी को मीना में*
*किसी को मंडल(धानुक) में*
*किसी को लोहार में*
*किसी को प्रजापति में*
*किसी को नाई में*
*किसी को तमोली में*
*किसी को माली में*
*किसी को किरार में*
*किसी को सुनार में*
*किसी को पाटीदार में*
*किसी को मेवाडा में*
*किसी को दर्जी में*
*किसी को खाती में*
*किसी को चौरसिया में*
*किसी को कहार में*
*किसी को पवार में*
*किसी को विश्नोई में*
*किसी को मल्लाह (निषाद) मे
*आदि, आदि....*
*🔹ओबीसी को 3743 जातिया में बाँट दिया है। यही हमारी बर्बादी का कारण है।*
☄☄☄☄
*OBC समाज के 99% लोग क्रीमीलेयर नहीं है। जानकारी के अभाव में खुद को क्रीमीलेयर मान बैठे हैं।*
🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹
*क्रीमीलेयर मे कौन-कौन ओबीसी आते हैं ??*
*(1) VVIP'S (संवैधानिक) पद जैसे, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के जज आदि।*
*(2) Govt. Or PSU employee of Central and state:-*
*👉 जिन बच्चों के माता या पिता में से कोई भी एक सीधे प्रथम श्रेणी के पद पर नियुक्त हुये हों।*
*👉 जिन बच्चों के माता और पिता दोनों ही सीधे द्वितीय श्रेणी के पद पर नियुक्त हुए हों।*
*👉 जिन बच्चों के माता या पिता में से कोई एक 40 वर्ष की आयु से पहले प्रथम श्रेणी में प्रमोट हुआ हो।*
*3 भारतीय सेनाओँ में कर्नल या उससे उपर के पद पर हो।*
*(4) जिन बच्चों के माता पिता की वेतन और कृषि आय को छोड़कर तीसरी कोई भी आय 6 लाख से अधिक हो।*
🍬शेष सभी नान क्रीमीलेयर हैं।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹Rahul Singh bauddha kushwaha khadiya ngla bharkhani Hardoi utter Pradesh
[3/12, 6:44 AM] Rahul Singh bauddha 🎻🎤🎹🎼🎸: https://9198979617consulting.wordpress.com/author/sastrirahulasinhabauddhaku/
[3/12, 6:45 AM] Rahul Singh bauddha 🎻🎤🎹🎼🎸: 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
अपना दीपक स्वयं बनो 🌸🌸
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बौध्द धर्म ईश्वर मे विश्वास नही करता है।
बौद्ध दार्शनिक धर्म कीर्ति जो जन्म से ब्राह्मण थे लिखा है।
वेदप्रमाण्म् कश्चित् कृतबाद:स्नाने धर्मेच्छा:जातिवाद अवलेपा:।
संताप आरम्भा :पापहानाय ध्वस्त प्रज्ञानाम् एतत् पंचलक्षणम्।
अर्थ - जो वेदो को ईश्वरीय पुस्तक कहकर वेदो का प्रमाण देते हैं। कोई तो कर्ता है इस का सृष्टि काअर्थात ईश्वर मे विश्वास करते हैं। स्नान को धर्म समझते है। जिन्हे ऊंची जाति का होने का घमंड है। पापो को नष्ट करने के लिए जो शरीर को कष्ट देते है जिनकी बुद्धि बिल्कुल चौपट हो गयी है यह उनके पांच लक्षण है।
रामचरित मानस का एक प्रसंग है। जब राम ने बालि का बध किया तो बालि ने राम से पूछा हे! राम मेरा आपने बध क्यो किया? राम ने कहा
अनुज बधू भगिनी सुत नारी। इनहि बिलोकहि पातक भारी।
छोटे भाई की पत्नी को बहिन को पुत्र की पत्नी को बुरी नजर से देखने बाले को भारी पाप लगता है। उसका बध करने से कोई पाप नही लगता है।
महाभारत में द्रोपदी का बिबाह अर्जुन से हुआ था क्योकि द्रोपदी के पिता राजा द्रुपद ने प्रतिज्ञा की थी जो चक्र मे घूमती मछली की आंख बेध देगा। द्रोपदी का बिबाह उसी राजकुमार से किया जायेगा। मत्स्य भेद अर्जुन ने किया था तो अर्जुन का विवाह द्रोपदी के साथ होना चाहिए फिर धर्मराज युधिष्ठिर द्रोपदी का पति कैसे बन गया? क्या यह अनुज बधू दोष नही था। अर्जुन का बिबाह करके जब पांच पांडव घर गये तो पांडवों ने कुंती से कहा मैने एक चीज पायी है। कुती ने कहा चीज को पांचो लोग मिल बांटकर खालो। फिर पांचो पांडव द्रोपदी के पति बन गये और द्रोपदी का एक नाम पांचाली पड गया।चलो अच्छा हुआ बह तो द्रोपदी थी। सारी सामाजिक धार्मिक मर्यादाओं को तार तार कर पांच पांडव द्रोपदी के पति बन गये। सबाल खडा होता है क्या यह अनुजूदोष था या नही।
राम ने बालि को परम धाम भेज दिया। अर्थात आत्मा परमात्मा मे लीन हो गयी। अध्यात्म की भाषा मे इसे मोक्ष कहते है।जब आत्मा परमात्मा मे लीन हो जाती है फिर वह आबागमन से अर्थात जन्म मृत्यु से मुक्त हो जाती है। किंतु महाभारत मे लिखा है जब कृष्ण की 120 वर्ष की अवस्था हुई तो बृक्ष के नीचे सोते समय एक बहेलिया ने तीर मार दिया। महाभारत मे लिखा यह बहेलिया बही बालि था। उसने अपना त्रेतायुग का बदला ले लिया। सबाल खडा होता है बालि की आत्मा आबागमन से मुक्त कंहा हुई। बालि की आत्मा परमात्मा मे लीन अर्थात उसे मोक्ष से लाभ क्या हुआ? अगले जन्म मे बालि से बहेलिया बन गया। राजा से रंक बन गया। बालि राजा था उसके क्या कमी रही होगी? सैकडों सेबक नौकर चाकर रहे होगे। सैकडों लोग उसके यंहा खाना खाते होगे। जब उसे मोक्ष मिल गया तो बहेलिया बन गया रहने के मकान नही खाने के लिए जंगली जानवरों का मांस खाता था। जिसका होना चाहिए था प्रमोशन हो गया डिमोशन।
फिर भी बहुत सारे देशो मे बौध्द धर्म राष्ट्र धर्म है। चीन कम्युनिस्ट देश है ।ईश्वर का नाम लेना भी अपराध है। जापान बौध्द देश है ।अभी दो तीन महीने पहले भारत के कि सी संत ने जापान मे कह दिया मै भगवान शिव का अबतार हूँ। अंधविश्वास फैलाने के आरोप मे मुकदमा चला महंत और उनके ग्यारह शिष्यों पर जापान की अदालत में मुकदमा चला और सारे लोगो की फांसी हो गयी कोई ईश्वर बचाने नही आया। यदि ईश्वर नाम की सत्ता है तो संसार के अंदरूअन्याय अत्याचार शोषण क्यो हो रहा है? यदि ईश्वर न्याय कारी है तो थाना दरबार अदालत न्यायालय पालिका इनकी क्या जरूरत। यदि न्यायिक व्यवस्था समाप्त कर दी जाय। और ईश्वरीय न्याय व्यवस्था पर सब छोड दिया जाय। जीबन नर्क बन जायेगा। पेरियार रामास्वामी नायकर कहा करते थे।
ईश्वर नही ईश्वर नही ईश्वर नही है सर्वथा।
खोजा था जिसने धूर्त था
पूजा उसने जो मूर्ख था।
ईश्वर भरोसे मनुज ने क्या कष्ट कुछ भोगा नही?
वह था नही है भी नही
और फिर होगा नही।
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यदुनंदन लाल लोधी हरदोई
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शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

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