सोमवार, 2 दिसंबर 2019

यदुनंदन लाल वर्मा लोधी राजपूत ।। क्या बौद्ध धर्म ईश्वर मे विश्वास करता है



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अपना दीपक स्वयं बनो 🌸🌸
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पंकज शर्माजी बौध्द धर्म ईश्वर मे विश्वास नही करता है। 
बौद्ध दार्शनिक धर्म कीर्ति जो जन्म से  ब्राह्मण थे लिखा है।

वेदप्रमाण्म् कश्चित् कृतबाद:स्नाने धर्मेच्छा:जातिवाद अवलेपा:।
संताप आरम्भा :पापहानाय ध्वस्त प्रज्ञानाम् एतत् पंचलक्षणम्।

अर्थ - जो वेदो को ईश्वरीय पुस्तक कहकर वेदो का प्रमाण देते हैं। कोई तो कर्ता है इस का सृष्टि काअर्थात ईश्वर मे विश्वास करते हैं। स्नान को धर्म समझते है। जिन्हे ऊंची जाति का होने का घमंड  है। पापो को नष्ट करने के लिए जो शरीर को कष्ट देते है जिनकी बुद्धि बिल्कुल चौपट हो गयी है यह उनके पांच लक्षण है।
रामचरित मानस का एक प्रसंग है। जब राम ने बालि का बध किया तो बालि ने राम से पूछा हे! राम मेरा आपने बध क्यो किया? राम ने कहा
 अनुज बधू भगिनी सुत नारी। इनहि बिलोकहि पातक भारी।

छोटे भाई की पत्नी को बहिन को पुत्र की पत्नी को बुरी नजर से देखने बाले को भारी पाप लगता है। उसका बध करने से कोई पाप नही लगता है।
 महाभारत में द्रोपदी का बिबाह अर्जुन से हुआ था क्योकि द्रोपदी के पिता राजा द्रुपद ने प्रतिज्ञा की थी जो चक्र मे घूमती मछली की आंख बेध देगा। द्रोपदी का बिबाह उसी राजकुमार से किया जायेगा। मत्स्य भेद अर्जुन ने किया था तो अर्जुन का विवाह द्रोपदी के साथ होना चाहिए फिर धर्मराज युधिष्ठिर द्रोपदी का पति कैसे बन गया? क्या यह अनुज बधू दोष नही था। अर्जुन का बिबाह करके जब पांच पांडव घर गये तो पांडवों ने कुंती से कहा मैने एक चीज पायी है। कुती ने कहा चीज को पांचो लोग मिल बांटकर खालो। फिर पांचो पांडव द्रोपदी के पति बन गये और द्रोपदी का एक नाम पांचाली पड गया।चलो अच्छा हुआ बह तो द्रोपदी थी। सारी सामाजिक धार्मिक मर्यादाओं को तार तार कर पांच पांडव द्रोपदी के पति बन गये। सबाल खडा होता है क्या यह अनुजूदोष था या नही।
राम ने बालि को परम धाम भेज दिया। अर्थात आत्मा परमात्मा मे लीन हो गयी। अध्यात्म की भाषा मे इसे मोक्ष कहते है।जब आत्मा परमात्मा मे लीन हो जाती है फिर वह आबागमन से अर्थात जन्म मृत्यु से मुक्त हो जाती है। किंतु महाभारत मे लिखा है जब कृष्ण की 120 वर्ष की अवस्था हुई तो बृक्ष के नीचे सोते समय एक बहेलिया ने तीर मार दिया। महाभारत मे लिखा यह बहेलिया बही बालि था। उसने अपना त्रेतायुग का बदला ले लिया। सबाल खडा होता है बालि की आत्मा आबागमन से मुक्त कंहा हुई। बालि की आत्मा परमात्मा मे लीन अर्थात उसे मोक्ष से लाभ क्या हुआ? अगले जन्म मे बालि से बहेलिया बन गया। राजा से रंक बन गया। बालि राजा था उसके क्या कमी रही होगी? सैकडों सेबक नौकर चाकर रहे होगे। सैकडों लोग उसके यंहा खाना खाते होगे। जब उसे मोक्ष मिल गया तो बहेलिया बन गया रहने के मकान नही खाने के लिए जंगली जानवरों का मांस खाता था। जिसका होना चाहिए था प्रमोशन हो गया डिमोशन। 

फिर भी बहुत सारे देशो मे बौध्द धर्म राष्ट्र धर्म है। चीन कम्युनिस्ट देश है ।ईश्वर का नाम लेना भी अपराध है। जापान बौध्द देश है ।अभी दो तीन महीने पहले भारत के कि सी संत ने जापान मे कह दिया मै भगवान शिव का अबतार हूँ। अंधविश्वास फैलाने के आरोप मे मुकदमा चला महंत और उनके ग्यारह शिष्यों पर जापान की अदालत में मुकदमा चला और सारे लोगो की फांसी हो गयी कोई ईश्वर बचाने नही आया। यदि ईश्वर नाम की सत्ता है तो संसार के अंदरूअन्याय अत्याचार शोषण क्यो हो रहा है? यदि ईश्वर न्याय कारी है तो थाना दरबार अदालत न्यायालय पालिका इनकी क्या जरूरत। यदि न्यायिक व्यवस्था समाप्त कर दी जाय। और ईश्वरीय न्याय व्यवस्था पर सब छोड दिया जाय। जीबन नर्क बन जायेगा। पेरियार रामास्वामी नायकर कहा करते थे।
ईश्वर नही ईश्वर नही ईश्वर नही है सर्वथा।
खोजा था जिसने धूर्त था
पूजा उसने जो मूर्ख था।
ईश्वर भरोसे मनुज ने क्या कष्ट कुछ भोगा नही?
वह था नही है भी नही
और फिर होगा नही।
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यदुनंदन लाल लोधी हरदोई
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शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

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