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परमात्मा!
कौन है ? कहाँ रहता है ? करता क्या है ?
आज तक मैं नहीं जान पाया हूँ फिर भी लोग कहते हैं परमात्मा पर विश्वास करो, मगर कैसे ? और क्यों ?
परमात्मा को खोजने के लिए मैंने बहुत से धर्मग्रंथों का सहारा लिया, मैं जितना परमात्मा के करीब जाता गया परमात्मा मेरी बुद्धि से उतना ही दूर होता चला गया!
सब धर्मग्रंथ कहते हैं परमात्मा ने सृष्टि की रचना की, सभी प्राणियों को जीवन और मृत्यु के चक्र में स्थापित किया, सबको बुद्धि और विवेक से अलंकृत किया, परमात्मा सर्वशक्तिमान है बगैरह बगैरह !
परन्तु इसी परमात्मा की शक्ति सुनामी, भूकंप या किसी बड़ी दुर्घटना के समय कहाँ खो जाती है ?
आजतक कभी किसी गंभीर बीमारी का इलाज इसी परमात्मा के मंत्रों से संभव हुआ है ?
जो परमात्मा किसी भूखे मनुष्य को एक वक्त का भोजन मुहैया नहीं करा सकता है उस पर विश्वास करना मूर्खता नहीं तो क्या है ?
सिर्फ ये विश्वास करना कि कोई मेरे साथ हो ना हो परमात्मा सदैव मेरे साथ है तो भइया जिसका होना ना होने के बराबर हो उस पर विश्वास करने से बेहतर है स्वयं पर विश्वास करो!
हिन्दू धर्मग्रंथों में ब्रह्मा को परमात्मा कहा गया है
भविष्यपुराण में उल्लेख आता है कि ब्रह्म्रा, विष्णु और महेश ने क्रमशः अपनी पुत्री, माता और बहन को पत्नी बना कर श्रेष्ठ पद प्राप्त किया ।
स्वकीयां च सुतां ब्रह्मा विश्णु देवो मातरम् !
भगिनीं भगवा´छंभु गृहीत्वा श्रेश्ठतामगात् !!
– प्रतिसर्ग खं. 4,18,27
अर्थात ब्रह्मा अपनी लड़की को, विष्णु देव अपनी माता को और शंभु अपनी बहन को ग्रहण कर के श्रेष्ठ पद को प्राप्त हुए ।
अब भी यही सब देवता आपके परमात्मा हैं ? तो बहुत अच्छी बात है मुझे व्यभिचारी, बलात्कारी परमात्मा की कोई आवश्यकता नहीं है !
ना तो कोई आजतक ये बता सका कि परमात्मा रहता कहाँ है सब कहते हैं परमात्मा का निवास कण कण में है अगर ऐसा है तो मनुष्यों की सहायता करने के लिए उसे तुरंत उपस्थित होना चाहिए कभी हुआ क्या ?
ना होगा!
इसीलिए मैं कहता हूँ स्वयं को समझो, अपनी शक्ति को
पहचानो, आप ही सत्य हो!
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शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा खदिया नगला भरखनी
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