सोमवार, 9 दिसंबर 2019

गौतम बुद्ध और ब्राह्मण लेखक राहुल शास्त्री





रविवार, 10 नवंबर 2019

तथागत बुध्द और ब्राह्मण के बीच तर्क


शास्त्री शाक्य राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा ग्राम खदिया नगला ।।

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.*_¶  ब्राह्मण : मै जन्म से श्रेष्ठ हूँ।
.*_¶  बुध्द     : कैसे ?
.*_¶  ब्राह्मण : क्योंकि मै ब्राह्मण हूँ।
.*_¶  बुद्ध     : ठीक है, अच्छा एक बात बताइए आपके घर की महिलाए गर्भवती होती है ?
.*_¶  ब्राह्मण : हांँ होती है।
.*_¶  बुद्ध     : वैसे हि होती है, जैसे अन्य महिलाए होती है, या फिर कुछ अगल से ?
.*_¶  ब्राह्मण : हांँ वैसे हि होती है।
.*_¶  बुद्ध     : आपकी महिलाओं की गर्भावस्था उतने हि समय कि होती है, जितने समय कि, अन्य महिलाओं की होती है ?
.*_¶  ब्राह्मण : हांँ उतने हि समय कि होती है।
.*_¶  बुद्ध     : बच्चे के जन्म लेने कि प्रक्रिया अर्थात प्रसूति भी लगभग वैसे हि होती है, जैसे अन्य महिलाओ के जरिए होती है ?
.*_¶  ब्राह्मण : हांँ वैसे हि होती है।
.*_¶  बुद्ध     : जब गर्भवती होने का तरीका, गर्भावस्था का समय और बच्चा प्रसूति का भी तरीका, ये सभीं प्रक्रियाएंँ एक हि समान है,
.*_¶  तो आप ब्राह्मण अपने आप को, किस आधार पर कहते है, कि हम ब्राह्मण पैदा होते, हि अर्थात जन्म से हि सर्व श्रेष्ठ होते है ......???
.*_¶  बुद्ध के इस प्रश्न का, ब्राह्मण के पास कोई उत्तर नही था .....
.*_¶  बुद्ध     : मतलब यह है, कि मानव अपने ऊच्च कर्म से श्रेष्ठ है अपने ऊच्चकर्म से हि महान है, ना कि जन्म से कोई भी सर्वश्रेष्ठ है.....

.*_¶  ब्राह्मण का राज उनके ज्ञान पर नहीं बल्की तुम्हारी अज्ञानता पर टिका है।
.*_¶  ब्राह्मण तुमसे पेड़ पुजवा सकता है,
पत्थर पुजवा सकता है, धरती, आकाश, जल, अग्नि, वायु, देहरी (चौखट), तस्वीर, लोहा, ईंट, पशु, पक्षी या जो कुछ भी उसे दिखाई दिया।
.*_¶  उसने तुमसे खुले आम पुजवा दिया।
और ये सब एक अनपढ़ ब्राह्मण ने, आपके पढ़े लिखे IAS, IPS, वक़ील, मजिस्ट्रेट, इंजीनियर, डॉक्टर शिक्षित लोगों से करवाया है।
.*_¶  फिर भी आप कैसे कह सकते हैं, कि आप ब्राह्मण के ग़ुलाम नही हैं ??

.*_¶  ब्राह्मणों की कहानी :
.*_¶  जब भूकम्प आने वाला हो तो उनको कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब हुदहुद तूफान आने वाला हो तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब ट्रेन पलटने वाली या लड़ने वाली हो तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब नोट बदलने वाला हो तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब अपने देश पर हमला होने वाला हो तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब देश मे बंम बिस्फोट होने वाला हो तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब केदार नाथ बाढ़ मे बह जाने वाला हो तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब भारत की राजधानी में किसी बस में लड़की का रेप होने वाला हो तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब देश मे आतंकवादी घूम रहे होते तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब सीमा के सैनिकों का गला कटने वाला हो तो ऊन को कुछ भी पता नही होता,
.*_¶  जब चारों धाम जाते समय यात्री बस खाई मे गिरने वाला हो तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब कोई प्लेन लुप्त होने वाली हो तो ऊन को कुछ भी पता नहीं होता,
.*_¶  जब बारिश होने पर बिजली कड़कने वाली हो और किसी के ऊपर बिजली गिरने वाली हो तो इन्हें कुछ भी पता नहीं होता।

.*_¶  इनको केवल वह जरुर पता होता है, जो वास्तविकता में सम्भव हि नहीं है।
.*_¶  जैसे,.............
.*_¶  किसी पर ग्रह नक्षत्र दोष, पिछले जन्म का पाप, मरने के बाद स्वर्ग दिलाना,
.*_¶  माता-पिता को मरने के बाद बैठाना, बच्चे को सत्तईसा में पड़ना, आदि सभीं प्रकार कि अन्ध विश्वास और मनगढंत बातें।
.*_¶  जिनको पिछले जन्म की और स्वर्ग की जानकारी हो, वे ये सब क्यों नहीं जानते ?
.*_¶  इसलिए नहीं जानते है, क्योंकि ये सब देखे जा सकते हैं, हक़ीकत जाना जा सकता है।
.*_¶  अंधविश्वास या अंधश्रद्धा समाज और देश के लिये, एक विकृत कलंकित अभिशाप है,
.*_¶  अर्थात सर्व सामान्य समाज के लोग कोई भी जन्म से नही, बक्लि कर्म से श्रेष्ठ होते है।

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