कुशवाह / कुशवाहा शब्द की उत्त्पत्ति सन् 1911 में आगरा की मीटिंग में हुई ।
इस मीटिंग में निर्णय किया गया कि कैसे *शाक -सब्जी -फूल -फल* उगाने वाली जातियों को एक नाम से जाना जाए, जिससे उनकी कोई एक पहचान बने । *कु = काछी, कोईरी, कुरी* *श = शाक्य, सैनी* *वा = वर्मा* *हा = हार्डिया* *लेकर एक नाम बनाया गया —कुशवाहा या कुशवाह...* √ बाद में जेपी चौधरी जैसे मनुवादी ने इस शब्द को *काल्पनिक रामायण के पात्र कुश और लव* से जोड़कर क्षत्रिय साबित करने का प्रयास किया | लेकिन हिन्दू ग्रंथ और मनुवादियों ने आज तक कुशवाह को शुद्र ही माना है । *हिन्दू ग्रंथ रामायण में "भगवान बुद्ध और उनके अनुयायियों" को चोर और "दुर्गा सप्तशती" (जिससे कथा होता है) में मौर्यों को असुर/ राक्षस बताया गया है |* यानि कथा कहवाने वाले हमारे पूर्वजों और हमलोगों को संस्कृत में गाली देते हैं | दिलचस्प बात यह है कि हमलोग खुश होते हैं और बकायदा कथा कहने के एवज में उसे धन भी देते हैं | ऐसे धर्म जिसमें गालियों से स्वागत है, वैसा धर्म हमलोगों का नहीं हो सकता है | √ जैसे ही जेपी चौधरी ने कुशवाह को *कुश और लव* से जोड़ा तो समाज जुड़ने के बजाय टूट गया । न ये उपनाम शाक्य, सैनी; न काछी, कोईरी; न वर्मा; और न ही हार्डिया, मौर्य ने अपनाया । √ क्योंकि *शाक्य और मौर्य वंश* का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है और हमेशा रहेगा | जिसकी उपजातियों के अन्तर्गत सैनी, वर्मा, काछी, हार्डिया, कोईरी, मुराव, मुराऊ, कुशवाहा, पटेल, फूले, माली, महतो, रेड्डी, सक्सेना, कछवाहा, सुराव, मुराव आते हैं | इनकी पहचान के लिए किसी *काल्पनिक रामायण के कुश और लव* की जरूरत नही है | √ *जिस दिन ये सभी अपनी शक्ति को पहचान गये और जान गये कि ये सब एक हैं और भगवान बुद्ध, सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक महान और सम्राट बृहद्रथ मौर्य के वंशज हैं उस दिन काल्पनिकों और विदेशी आर्यों को अपने स्वयं के देश यूरेशिया भागना पड़ेगा | *√☸*मौर्य शासकों की सूची* (323 -184) ईसा पूर्व 1) *सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य* 2) *सम्राट बिन्दुसार मौर्य* 3) *सम्राट अशोक महान* 4) *सम्राट कुणाल मौर्य* 5) *सम्राट दशरथ मौर्य* 6) *सम्राट सम्प्रति मौर्य* 7) *सम्राट शालिसुक मौर्य* 8) *सम्राट देववर्मन मौर्य* 9) *सम्राट शतधन्वन मौर्य* 10) *सम्राट बृहद्रथ मौर्य* √ मौर्य साम्राज्य के अन्तिम *बौद्ध सम्राट बृहद्रथ मौर्य* को ही आर्यों ने *रावण* बनाया तथा सम्राट बृहद्रथ मौर्य के हत्यारे *ब्राह्मण पुष्यमित्र शुंग को "राम"* के रूप में प्रचारित किया | यह मौर्य वंश के 10 वें बौद्ध सम्राट बृहद्रथ मौर्य को मारकर उसके 10 पीढ़ियों के अस्तित्व को समाप्त करने के कारण दशहरा (दस हरा = दस को मारने वाला) नाम प्रचारित किया गया | √☸इसलिए आप सभी लोग इसे *सम्राट अशोक विजयादशमी* के रूप में मनाये | जिस प्रकार सम्राट अशोक महान इस दिन बौद्ध धम्म में दीक्षित हुए थे | और अशांति पर शांति की, हिंसा पर अहिंसा की, क्रोध पर करूणा की विजय हुई | जिसे विजयकाल कहा गया और उसी दिन से यह दिन राष्ट्रीय पर्व बन गया | सम्राट अशोक स्वयं इस पर्व में भाग लेते थे | यह दिन *धम्म विजय* का पर्व बन गया | इसी प्रकार हमें भी *सम्राट अशोक विजयादशमी* के दिन अधिक से अधिक *बौद्ध धम्म दीक्षा* समारोह करना चाहिए | √☸आज भी इस पर्व को संपूर्ण एशिया में बौद्ध उपासक व मौर्य/शाक्य वंशज *सम्राट अशोक विजयादशमी* के रूप में प्रति वर्ष दशहरे के दिन बड़ी श्रद्धा और धूम -धाम से मनाते हैं | ☸☸☸☸☸☸☸☸ ☸
*आप सभी का दिन मंगलमय हो
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शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाह

Superb
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