रविवार, 3 नवंबर 2019

यादवों का असुर कनेक्शन ? यादव वंश की उत्पत्ति वंशावली



कहानी कविताए 



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एक ज्वलंत विमर्श-
"अहीरों का 'असुर' कनेक्शन"?......
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          मेरी समझ से वर्तमान दौर में अहीरों के मध्य तीन तरह के कंसेप्ट के लोग हैं।एक सनातनपंथी/हिन्दुत्ववादी/आर्य या स्वयम्भू क्षत्रिय मानने वाले,दूसरे खुद को शूद्र/असुर/ओबीसी/बहुजन/अनार्य/मूलनिवासी मानने वाले और तीसरे तटस्थ या इस पचड़े में न पड़ने वाले।
        हम तो शूद्र/असुर या बहुजन कंसेप्ट वाले हैं और इस कंसेप्ट पर चर्चा को आगे बढ़ाने हेतु कुछ तथ्य रख रहे हैं क्योंकि अभी मध्यप्रदेश में दो एससी समाज के मासूम बच्चों को सड़क पर शौच करने के कारण दो अहीरों ने लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला है और उनमें से एक ने पुलिस को अपने अजीबोगरीब बयान में कहा है कि "भगवान का आदेश हुवा है कि राक्षसों का सर्वनाश कर दो।"
         मेरे बहस का विषय "राक्षस" ही है क्योकि इन मध्यप्रदेश के हत्यारे अहीरों में से एक के कथनानुसार एससी बच्चों को मारकर उसने राक्षस संहार किया है।आखिर ये "राक्षस" हैं कौन?
         मैं यदि कहूं कि हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक एससी राक्षस हैं या नही यह तो संशय का विषय है लेकिन "अहीर" प्रूवड(प्रमाणित) राक्षस हैं तो कोई अतिशयोक्ति न होगी।अहीर लोग कृष्ण को अपना कुलपुरुष/महापुरुष या पितामह मानते हैं।मैं भी मानता हूं।आर्यो का मूल ग्रंथ वेद है।वेद के एक प्रकार "ऋग्वेद" के मण्डल-01 के सूक्त-101,130 व मण्डल-08 के सूक्त-96 के 13,14,15,17 वें मंत्र-गायत्री परिवार की पुस्तक में जबकि यही विश्व बुक्स में 8 वे मंडल के 85 वें सूक्त का 13,14,15,17 वां मंत्र में वर्णित है कि "कृष्ण नामक असुर की गर्भवती स्त्रियों को इंद्र ने मारा,कृष्ण नामक असुर की काली खाल उतारकर उसे अंशुमती (यमुना) नदी के किनारे मारा व भस्म कर दिया।शीघ्र गति वाले व दस हजार सेनाओं को साथ लेकर चलने वाले कृष्ण नामक असुर व उसकी वधकारिणी सेनाओं को इंद्र ने अपनी बुद्धि से ढूंढकर मानव हित हेतु नाश कर डाला।अंशुमती नदी के किनारे गुफा में घूमने वाले कृष्ण असुर जो दीप्तिशाली सूर्य के समान जल में स्थित है को मारने हेतु इंद्र मरुतों का आह्वान करते हैं।तेज चलने वाले कृष्ण असुर को अंशुमती नदी के किनारे जो दीप्तिशाली बनकर रहता था बृहस्पति की मदद से इंद्र ने उसकी काली व आक्रमण हेतु आ रही सेनाओं का वध किया।इंद्र ने कृष्ण असुर को नीचे की ओर मुंह करके मारा व शत्रुओं की गायें प्राप्त की।"ऋग्वेद के इन प्रसंगों को पढ़कर कैसे कहा जा सकता है कि यह असुर कृष्ण "अहीर/गोपालक/शेफर्ड कृष्ण" नही हैं?यमुना नदी,गाये,दस हजार सेनाये,गर्भवती पत्नियां(कृष्ण की कई पत्नियां थीं),सूर्य के समान दीप्तिशाली,शीघ्र गतिवाला आखिर कौन असुर कृष्ण होगा?क्या उनके अहीर या शेफर्ड कृष्ण होने से इनकार किया जा सकता है?
        अहीर लोग जब कृष्ण को अपना पूर्वज व पितामह मानते हैं तो कृष्ण व रुक्मिणी से जन्मे प्रद्युम्न के पुत्र अनिरुद्ध व उनकी पत्नी उषा को वे अपना जेनेटिक मदर+फादर(माता-पिता) मानेंगे ही, ऐसे में उषा की उत्पत्ति भी खंगालनी होगी।इस देश के बहुजनो के इतिहास के जो भी उपलब्ध साक्ष्य या प्रमाण हैं वे आर्य लिखित ग्रन्थों में ही हैं जिन्हें उन्होंने विद्रूप करके लिखा है,इनके अतिरिक्त सिंधु घाटी की सभ्यता या जेनेटिक रिसर्च ही साक्ष्य हैं जिन्हें समझना थोड़ा टिपिकल/क्रिटिकल है।हमे इन आर्य गर्न्थो का प्रतिकार भी करना है और इनमें से ही हमे अपना कनेक्शन भी ढूंढना है।इसी कनेक्शन को तलाशते हुये हम पाते हैं कि यदि कृष्ण अहीर थे तो उनके पोते अनिरुद्ध की पत्नी उषा के पिता बाणासुर राक्षस राज थे जो असुर राज बलि के पुत्र थे जिन्हें विष्णु ने बामन अवतार धारण कर मारा था।बलि के पिता विरोचन,विरोचन के पिता प्रह्लाद,प्रह्लाद के पिता हिरणकश्यप थे जिनका वध विष्णु ने नरसिंह अवतार ले किया था।हिरणकश्यप के पिता असुर राज दिति थे।इस प्रकार बाणासुर,बलि व हिरणकश्यप उषा के पिता,दादा व परदादा हुये जिस हिसाब से ये कृष्ण के समधी हुये और सभी अहीर उषा की कोख से जन्मे उनके पुत्र।अब फिर प्रश्न वहीं खड़ा है कि क्या अहीर राक्षस नही हैं?
       महिषासुर व दुर्गा का प्रसंग भी यहां मौजू है।मैसूर शहर में आज भी महिषासुर की विशाल मूर्ति स्थित है।मैसूर राज्य अहीरों का राज्य रहा है जहां का आज भी वाडियार राजा अहीर ही है।"मैसूर" नाम ही महिषासुर के नाम पर पड़ा प्रतीत होता है।महिषासुर की कद-काठी,रूप-रंग,शरीर-मूंछ,पेशा-व्यवसाय,भैंस का साथी बनाये जाने आदि से हम समझ सकते हैं कि यह प्रसंग भी आर्य-अनार्य अर्थात देव-दानव/सुर-असुर कनेक्शन को इंगित करता है और सिम्पटम बताते हैं कि यह महिषासुर भी कोई भैंस पालक/प्रजापालक अहीर राजा ही रहा होगा जिसे आमने-सामने के युद्ध मे परास्त न कर पाने की दशा में छल से मारा गया होगा।
        अब फिर हम रामायण काल मे अर्थात कथित त्रेता काल मे भी अहीरों की दशा का अवलोकन उन अहीरों को करवा देते हैं जिन्हें वर्तमान एससी/एसटी राक्षस नजर आते हैं और वे भगवान के आदेश के पालनकर्ता।महर्षि बाल्मीकि लिखते हैं कि जब राम लंका जाने हेतु समुद्र के किनारे पँहुच उससे सूखने को कहते हैं और वह सूखने से मना कर देता है तो राम अपने धनुष पर बाण चढ़ा उसे सुखाने को उद्यत हो जाते हैं फिर समुद्र प्रकट हो कहता है कि हे राम! तुम्हारे पास नल-नील इंजीनियर हैं उनसे सेतु बांध उस पार चले जाओ।ऐसा करने से तुम मुझे पार भी कर जाओगे और मेरा प्रवाह भी नही रुकेगा।राम समुद्र की बात सुन सेतु बनाने की बात मान जाते हैं लेकिन धनुष पर चढ़े बाण को कहीं न कहीं चलाने की वात कह पूछते हैं कि तुम्ही बताओ इसे कहाँ चलाएं?राम के इस कथन के बाद समुद्र कहता है कि हे राम! मेरे उत्तर एक पवित्र देश द्रुमकुल्या है जहां पापी/लुटेरे अहीर रहते हैं जो मेरा जल पीते हैं।इनके स्पर्श से मुझे बड़ी पीड़ा होती है।आप अपने बाण को उन्ही पापी अहीरों पर छोड़ दें।राम ने अपने उस बाण को समुद्र के कथनानुसार अहीरों के राज्य द्रुमकुल्या पर छोड़ दिया जिससे वह पूरा का पूरा राज्य मरुस्थल में परिवर्तित हो गया।वहां के सारे अहीर/यादव मारे गए।
      तुलसी दास भी इसे रामचरितमानस में कुछ इस प्रकार लिखते हैं कि "आभीर,यवन,किरात....अति अधरूपजे।"अर्थात अहीर,मुसलमान आदि अधम व नीच हैं।इसे ही ब्यास स्मृति में कुछ यूं लिखा गया है कि "बर्द्धिको, नापितो,गोपः, आशापः....कर वीक्षणम।" अर्थात बढ़ई,नाई, अहीर आदि नीच हैं।इन्हें देख लेने के बाद स्नान कर सूर्य का दर्शन करने के बाद ही पवित्र हुवा जाता है।
        भारत सरकार का नेशनल बुक ट्रस्ट अपने किताब "हिंदुस्तानी कहावत कोष" में पृष्ठ संख्या 16 पर लिखता है कि "अहीर से जब गुन निकले जब बालू से घी",डीएलएड थर्ड सेमेस्टर के राधा परीक्षा गाइड के 2019 के 50 वें रिवाइज एडिशन में पढ़ाया जा रहा है कि "अहीर होना-मूर्ख होना।प्रयोग-श्याम को समझाना व्यर्थ है वह तो निरा अहीर है।"लूसेन्ट सम्पूर्ण हिंदी ब्याकरण रचना" में मुहावरों में पढ़ाया जा रहा है कि "अहीर होना-मूर्ख होना" है।क्या यह हमारे शूद्र या राक्षस कनेक्शन का आभास नही कराता है?
        वर्तमान दौर में ही अहीर लोग देंख ले जिसमें लालू प्रसाद यादव जी को उसी तरीके से हतने की कोशिश हो रही है जैसे कृष्ण,हिरण्यकश्यप, बलि,महिषासुर आदि को पस्त कर हत दिया गया था।मुलायम सिंह यादव जी को बाबर की औलाद,मुल्ला,मौलाना कह अपमानित किया गया है तो उनके पुत्र अखिलेश यादव जी को टोंटीचोर कह अपमानित किया जा रहा है।वह सरकारी मुख्यमंत्री आवास इस नाते गोमूत्र व गंगाजल से धुला जा रहा है कि उसमें पूर्व में अखिलेश यादव जी निवास किये हैं।
        अहीर समाज के लोगों के समक्ष कुछ चीजें उन्ही वेदों व पुराणों से कोड कर व वर्तमान सामाजिक परिस्थितियो को देखते हुये विचारार्थ रखने का हमने प्रयास किया है कि जो राक्षस,असुर,दानव, शूद्र आदि शब्द हम प्रयोग में लाते हैं वह कोई और नही बल्कि हमी हैं।हमारे ही पुरखो को जो इस देश के मूल निवासी,शासक,राजा थे उन्हें मध्यएशिया से आये आर्यों ने छल बल से परास्त कर इन भयानक से लगने वाले नामों/विशेषणों से सम्बोधित कर उनके प्रति हमारे मन मे घृणा के भाव भर दिए जो वास्तव में हमारे पूर्वज व इस देश के शासक/नायक थे।बावा साहब डा भीम राव अम्बेडकर जी ने इसी नाते कहा कि "हे बहुजन समाज के लोगो! जाओ और अपने घरों की दीवारों पर लिख दो कि हम ही इस देश की शासक कौमें हैं।"
        आज जरूरत हमे मिथकों,किम्बदन्तियो,लक्षणों आदि में तथा आर्य ग्रन्थों में विद्रूप रूप में दर्शाए गए प्रकरणों में अपना इतिहास ढूंढकर निकालने की है।हमे जरूरत अपने मूल पूर्वजो को जानने की है जिन्हें राक्षस,असुर,दानव कह हमसे ही उन्हें दुतकरवाया जाता है।खास तौर पर उन अहीर लोगो को या उन पिछडो को जो क्षत्रिय बनने की लालसा पाले हुये हैं और एससी/एसटी को शूद्र या राक्षस समझ रहे हैं उन्हें अपना इतिहास जानना होगा कि एससी/एसटी ही नही वरन वे सभी 85 प्रतिशत लोग जो ओबीसी या हिन्दू से कन्वर्टेड सिख,ईसाई, बौद्धिष्ट,मुसलमान,जैनी आदि हैं,सभी के सभी राक्षस/असुर/दानव/मूलनिवासी/बहुजन ही हैं।
-चंद्रभूषण सिंह यादव
प्रधान संपादक-"यादव शक्ति"/कंट्रीब्यूटिंग एडिटर-"सोशलिस्ट फ़ैक्टर"

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