🔹बाल्मीकि रामायण 🔹
प्रथम खण्ड पेज संख्यसं 126
जैसा कि बताया गया है कि इन्द्र ने अहिल्या के साथ छल करके उसका सतीत्व भंग किया था ।
परन्तु
सबसे प्राचीन रामायण बाल्मीकि रामायण मे बाल्मीकि ने स्पष्ट किया है कि
अहिल्या और इंन्द्र के बीच गौतम ऋषि से छुपकर शारीरिक संबंध थे ।
आइए नजर डालते हैं बाल्मीकि रामायण के स्लोकों पर 👇👇
1 ,, मुनिवेषं सहस्त्राक्ष विज्ञाय रघुनंदन ।
मतिम चकार दुर्मेधा देवराज कुलूहलात ।।।
अर्थ 🔹 महा ऋषि गौतम का वेश धारण करके आए हुए इंद्र को पहचान कर भी उस मतवाली नारी ने अहो देवराज इंद्र मुझे चाहते हैं।
इस कौतूहल वश उसने उनके साथ समागम का निश्चय करके वह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया
🔸सम्भोग के बाद अहिल्या ने जवाब दिया कि 👇👇
स्लोक 🔹
यथाबृवीत् सुर श्रेष्ठं कृतार्थेनान्तरात्मना
कृतार्थास्मि सुर श्रेष्ठ गच्छ शीघ्र मितः प्रभो, ।
आत्मानम् मां च देवेश सर्वथा गौतमात ।।।
अर्थ 🔸
रति के पश्चात उसने देवराज इंद्र से संतुष्ट चित्त होकर कहा की
हे सुर श्रेष्ठ मैं आपके समागम से कृतार्थ हो गई हूं प्रभु अब आप शीघ्र यहां से चले जाइए देवेश्वर महर्षि गौतम के कोप से आप अपनी और मेरी भी सब प्रकार से रक्षा कीजिए ।।
🔽तब इन्द्र ने कहा 🔽
स्लोक 🔸
इन्द्रस्तु प्रहसन वाक्यंमहल्यामि दमबृवीत ।
सुश्रोणि परितुष्ठो अस्मि गमिस्यामि यथागतम् ।।।
अर्थ 🔹
तब इंद्र ने हंसते हुए अहिल्या से कहा सुंदरी मैं भी संतुष्ट हो गया हूं अब जैसे आया था उसी प्रकार चला जाऊंगा
कोई भी बात बिना सोचे समझे जाने
तथा बिना तर्क किये स्वीकार नही करनी चाहिए, ,,,,,
🌹नमो बुध्दाय 🌹
शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध


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