बुधवार, 27 नवंबर 2019

मानव जीवन नाशवान है राहुल सिंह बौद्ध



                                        🌷🌷नमो बुध्दाय 🌷🌷

 
 जब आप इस दुनिया से चले जाओगे तो लोग आपको कैसे याद रखेंगे???
  मानव जीवन नाशवान है, अत: इसका हर पल परिवार व समाज के सदकार्यो में लगाये। हमेशा याद रखें कि आपका समाज के प्रति भी कर्ज बाकी है। क्या समाज के बीच आपने कोर्इ पहचान बनार्इ है ???
    जीवन भर दिग्भ्रमित होते रहे और अन्त में एक दिन साँसे बन्द हो जाएगी। आप शून्य से आये थे और शून्य में चले जाओंगे। अत: समाज विकास हेतु समय की मुख्य धारा में रहकर अपने दायित्व निर्वाह के लिए कुछ अमूल्य समय का योगदान अवश्य करे। यदि इसी कार्य के लिए जब आपके जीवन की ऊर्जा शक्ति एवं इच्छा शक्ति काम आए, तो आपका यह जीवन समाज के लिए सार्थक माना जायेगा, सकारात्मक चिंतन मनन से वैचारिक क्रांति लाकर यदि समाज के विकास में चार-चाँद लगते हैं, तो बहुत अच्छा, जिससे समाज की प्रगति है।
    हमको ध्यान रखना होगा कि समाज का सार्वांगीण विकास कैसे हो???
   समाज का युवावर्ग, जो समाज का भावी कर्णधार है, साथ ही साथ अत्यधिक ऊर्जावान भी है, वह अपनी श्रमशीलता से समाज का परिदृष्य बदलने में अहम भूमिका निभाकर सर्वांगीण विकास की धारा में ला सकता है, यही उनका समाज के प्रति परम कर्त्तव्य है। हर युवा को सकल्प करना चाहिए  - बीज हूँ, तो वृक्ष बनूँगा। मेरे फल समाज के काम आए।।                  

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