शनिवार, 30 नवंबर 2019

स्वर्ग कहां है लेखक राहुल शास्त्री

हां स्वर्ग कहां है बहुत अच्छा प्रश्न रहा है साथियों आपका शायद जिसे प्राप्त करने की इच्छा हर व्यक्ति की रही है परंतु वह स्वर्ग है कहां इसके बारे में सोचने की जरूरत कोई करता ही नहीं लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए व्यक्ति जाने किन किन आडम्बरियों की शरण में चले जाते हैं ऐसे ढोंगी भोले भाले समाज को चिकनी चुपड़ी कहानियां सुनाकर गुरु मंत्र देकर अपनी जनसंख्या वृद्धि करने में जुटे हैं साथियों आप जानते हैं कि जिसकी जनसंख्या ज्यादा होती है उसकी ही वैल्यू ज्यादा होती है और उसकी पूजा होती है।

मैं इस भोली भाली जनता से कहना चाहूंगा जो गुरु तुम्हें ज्ञान देने के बाद में भी तुम्हें आश्वासन नहीं देता है कि जाओ अब तुम स्वयं जन-जन में शांति और धर्म का प्रकाश करो मैंने बहुत चेला लोगों से मुलाकात की उनसे पूछा कि भाई आपने जो नियम सिद्धांत सीखे हैं वह हमें भी बताएं ताकि मैं भी धर्म धारण कर सकूं।।

तो उन्होंने जवाब दिया कि इसके लिए तुम्हें मेरे गुरु की शरण में जाना होगा क्यों यही तो वही कारण है गुरु ने शिष्यों को आश्वासन दिया ही नहीं जाकर तुम भी शिष्य बनाओ शांति अहिंसा और धर्म का प्रचार करो।
दोस्तों यह बात बहुत ही विचारणीय है कि अगर वे अपने शिष्यों को आश्वासन दे दे तो गुरु के पास जाएगा ही कौन उनकी पूजा कौन करेगा।
तो देखिए स्वयं कितने कपटी होते हैं छलिया होते हैं भेदभाव छुआछूत अस्पृश्यता होती है मगर हमें दुख इस बात का है कि हमारा भोला भाला समाज इस चीज को समझने में असमर्थ होता है।।
मैं तो यही कहूंगा कि जो बात समाज के लिए कल्याणकारी है शांति अहिंसा और धर्म को साधने वाली है उसका प्रचार तो सरेआम करना चाहिए और किया जाता है लेकिन वह कहते हैं कि मेरा गुरु मंत्र सब को बताया नहीं जाता है।।⤵

आप अच्छे तरीके से जानते होंगे की बात को ना बताया जाने के कारण दो ही हो सकते हैं पहला या तो वह गुरु कुछ जानता ही नहीं है और दूसरा या तो उसकी बात जो उसने बताई है सो गलत है।।
तो साथियों क्या ऐसे स्वर्ग मिल पाएगा शांति अहिंसा करुणा मित्रता मानवता और एक दूसरे के प्रति लगाओ ही स्वर्ग का अर्थ है हर मनुष्य हिंसा चोरी व्यभिचार और झूठ नशीले पदार्थ आदि का परित्याग करके धर्म का आचरण करें साथियों वही साक्षात स्वर्ग है।
मनुष्य मन से न बुरा सोचे वाणी से न बुरा कहे और अपनी काया से न बुरा करें वही स्वर्ग है।।

कहते हैं कि स्वर्ग में बहुत अच्छा लगता है परंतु मैं पूछता हूं कि क्या स्वर्ग की व्यवस्था को किसी ने देखा है नहीं देखा बिना देखे फिर कैसे अनुभव कर लिया स्वर्ग है जिस प्रकार आंखों से देखकर रूप और रंग की पहचान की जाती है और जीभ से चखकर 6 रसों की पहचान की जाती है और कानों से सुन कर सात सुरों की पहचान की जाती है त्वचा से स्पर्श करके मनुष्य तत्व की पहचान करता है नाक से सूघ कर गंद की पहचान की जाती है और यह तो सारे अंग मनुष्य के पास ही होते हैं मृत्यु के बाद क्या मनुष्य इन सभी चीजों का अनुभव कर पाएगा।

अर्थात जहां सब कुछ मन के अनुकूल है वही स्वर्ग है अगर नहीं है तो फिर मना कर दो कि मां की गोद में स्वर्ग नहीं है जिस पिता ने तुम्हारे पेट के लिए अपना खून पसीना नष्ट किया क्या उसके अंजुमन में स्वर्ग नहीं है दिन भर के थके मांदे शाम को जब घर वापस आते हो और कहते हो कि वह अब चैन मिला सोचो कि तुम्हारा वह घर स्वर्ग नहीं है।।।।।।।
इस संसार में स्वर्ग कहीं भी नहीं है स्वर्ग है तो यहीं है यहीं है यहीं है।।


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जिन भाइयों को कोई समस्या हो स्वर्ग आदि जैसी चीजों को लेकर तो वह हमसे संपर्क करके अपने सलाह दे सकते हैं और डिस्कस कर सकते हैं मेरा संपर्क सूत्र 9198 9796 17
नमो बुद्धाय साथियो मैं शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

Rahul-Singh-Bau 

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